बहू प्रिया कपूर और करिश्मा कपूर के बच्चों के खिलाफ संजय कपूर की मां पहुंची हाइकोर्ट, 'फर्जी फैमिली ट्रस्ट' का लगाया आरोप

Update: 2026-01-21 08:29 GMT

दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की मां रानी कपूर ने दिल्ली हाइकोर्ट का रुख करते हुए अपनी बहू प्रिया कपूर और एक्ट्रेस करिश्मा कपूर के बच्चों के खिलाफ एक दीवानी वाद दायर किया। याचिका में आरोप लगाया गया कि एक फर्जी और धोखाधड़ीपूर्ण फैमिली ट्रस्ट बनाकर उन्हें उनकी पूरी संपत्ति और पारिवारिक विरासत से अवैध रूप से वंचित कर दिया गया।

करीब 80 वर्षीय विधवा रानी कपूर ने कहा कि तथाकथित आरके फैमिली ट्रस्ट/रानी कपूर फैमिली ट्रस्ट पूरी तरह अवैध, शून्य और अमान्य है। उनका दावा है कि उनकी जानकारी या सहमति के बिना उनकी संपूर्ण संपत्ति और पारिवारिक विरासत को इस ट्रस्ट में स्थानांतरित कर दिया गया।

रानी कपूर के अनुसार उन्हें अपने साथ हुई इस कथित धोखाधड़ी की जानकारी अपने बेटे संजय कपूर के निधन के बाद ही मिली। संजय कपूर का निधन 12 जून 2025 को हुआ था।

इस वाद में कुल 23 प्रतिवादियों को पक्षकार बनाया गया, जिनमें प्रिया कपूर, उनका बेटा अजारियस कपूर, करिश्मा कपूर के बच्चे समायरा कपूर और कियान कपूर, रानी कपूर की बेटी मंधीरा कपूर स्मिथ और उनके दो बच्चे शामिल हैं।

वाद में कहा गया कि रानी कपूर अपने दिवंगत पति डॉ. सुरिंदर कपूर की संपत्ति की एकमात्र उत्तराधिकारी और लाभार्थी हैं। डॉ. सुरिंदर कपूर, सोना समूह के प्रवर्तक थे और उनका निधन जून 2015 में हुआ था। उन्होंने 6 फरवरी, 2013 को एक वसीयत बनाई, जिसके तहत उनकी पूरी संपत्ति, जिसमें सोना समूह की विभिन्न कंपनियों में हिस्सेदारी भी शामिल थी रानी कपूर को प्राप्त हुई।

याचिका में यह भी कहा गया कि उक्त वसीयत को जनवरी 2016 में बॉम्बे हाइकोर्ट द्वारा विधिवत प्रोबेट प्रदान किया गया था, जिसमें रानी कपूर के तीनों बच्चों ने अपनी अनापत्ति दी थी।

इसके बावजूद, रानी कपूर का आरोप है कि कई वर्षों के दौरान अवैध लेनदेन के जटिल जाल के माध्यम से उनकी संपत्तियों को धीरे-धीरे हड़प लिया गया और अक्टूबर 2017 के आसपास कथित रूप से बनाए गए आरके फैमिली ट्रस्ट में डाल दिया गया वह भी उनकी जानकारी और सहमति के बिना।

रानी कपूर ने यह भी आरोप लगाया कि संजय कपूर के निधन के तुरंत बाद उनकी बहू प्रिया कपूर ने तेजी से सोना समूह की प्रमुख कंपनियों पर नियंत्रण हासिल करने के कदम उठाए। याचिका के अनुसार अंतिम संस्कार के कुछ ही दिनों के भीतर प्रिया कपूर को निदेशक और प्रबंध निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त कर दिया गया, जबकि इस संबंध में रानी कपूर को न तो जानकारी दी गई और न ही उनसे कोई परामर्श किया गया।

इसके अतिरिक्त यह भी आरोप लगाया गया कि रानी कपूर की कंपनी से जुड़ी सूचनाओं तक पहुंच रोक दी गई। उनके ईमेल खाते को हैक होने का झूठा दावा कर निष्क्रिय कर दिया गया। उनकी जानकारी के बिना एक नया ईमेल आईडी बनाकर उसका इस्तेमाल ट्रस्ट और कंपनी प्रबंधन में बदलाव करने के लिए किया गया।

रानी कपूर ने आरके फैमिली ट्रस्ट को अवैध, फर्जी और अपंजीकृत बताते हुए हाइकोर्ट से प्रार्थना की कि उनकी पूरी संपत्ति और पारिवारिक विरासत को उस स्थिति में बहाल किया जाए, जैसी वह विवादित ट्रस्ट के गठन से पहले थी।

उल्लेखनीय है कि इसी मामले से जुड़े एक अन्य पहलू में दिल्ली हाइकोर्ट ने एक्ट्रेस करिश्मा कपूर के बच्चों समायरा कपूर और कियान कपूर द्वारा दायर याचिका में अंतरिम राहत पर आदेश सुरक्षित रखा हुआ, जिसमें उन्होंने अपने दिवंगत पिता की व्यक्तिगत संपत्ति में हिस्सेदारी की मांग की।

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