शिक्षा के अधिकार का मतलब यह नहीं है कि पात्रता शर्तों को पूरा किए बिना अपनी पसंद के कोर्स में सीट मिल जाए: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाले 'शिक्षा के अधिकार' में यह शामिल नहीं है कि कोई व्यक्ति निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा किए बिना अपनी पसंद के प्रोग्राम में दाखिला ले सके।
जस्टिस जसमीत सिंह ने यह टिप्पणी तब की, जब उन्होंने CUET-UG 2025 के माध्यम से स्नातक (अंडरग्रेजुएट) दाखिलों के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय के 'सब्जेक्ट-मैपिंग' (विषय-मिलान) मानदंडों को सही ठहराया।
अदालत ने कहा,
"संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत शिक्षा के अधिकार का मतलब यह नहीं है कि किसी को उसकी पसंद के प्रोग्राम में बिना पात्रता शर्तें पूरी किए सीट दे दी जाए।"
अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय के 'बुलेटिन ऑफ इंफॉर्मेशन 2025' के क्लॉज 5 को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की। इस क्लॉज के अनुसार, उम्मीदवारों के लिए CUET-UG में उन्हीं विषयों की परीक्षा देना अनिवार्य है, जो उन्होंने कक्षा 12 में पढ़े हैं या जिनमें वे कक्षा 12 पास कर चुके हैं।
याचिकाकर्ता सुवन यदुवंशी ने शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए शिवाजी कॉलेज में BA (ऑनर्स) इतिहास प्रोग्राम में दाखिला मांगा था। हालांकि उन्हें 'सशस्त्र बल' (आर्म्ड फोर्सेज) श्रेणी के तहत अस्थायी रूप से एक सीट आवंटित की गई, लेकिन बाद में 'सब्जेक्ट-मैपिंग' मानदंडों को पूरा न करने के कारण उनका दाखिला रद्द कर दिया गया।
उन्होंने तर्क दिया कि यह शर्त मनमानी और असंवैधानिक है तथा 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020' के खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने CUET-UG में अपनी योग्यता (मेरिट) के आधार पर सीट हासिल की थी।
इस चुनौती को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि 'सब्जेक्ट-मैपिंग' मानदंडों का एक तार्किक आधार है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी प्रोग्राम में दाखिला लेने वाले छात्रों ने कक्षा 12 के स्तर पर बुनियादी विषयों का अध्ययन किया हो और उन विषयों में उनकी परीक्षा भी ली गई हो।
अदालत ने गौर किया कि यह शर्त सभी उम्मीदवारों पर समान रूप से लागू होती है और दाखिला प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही इसे सार्वजनिक कर दिया गया था।
अदालत ने आगे कहा कि पात्रता शर्तें तय करने का अधिकार, छात्रों को दाखिला देने की विश्वविद्यालय की शक्तियों का ही एक हिस्सा है। साथ ही यदि किसी एक उम्मीदवार को इससे कोई कठिनाई होती है, तो भी इसका मतलब यह नहीं है कि ये मानदंड मनमाने हैं।
अदालत ने याचिकाकर्ता के इस तर्क को भी खारिज किया कि मेरिट के आधार पर सीट मिलने से उसे प्रवेश पाने का अधिकार मिल जाता है। अदालत ने कहा कि CUET में मेरिट से केवल योग्य उम्मीदवारों की रैंकिंग तय होती है, न कि यह पात्रता का विकल्प बनती है।
इसके चलते याचिका खारिज कर दी गई।
Case Title : Suvan Yaduvanshi v. University of Delhi & Ors