POCSO Case : बेटी से रेप करने वाले पिता को कोई नरमी नहीं, दिल्ली हाइकोर्ट ने सजा बरकरार रखी

Update: 2026-01-22 06:26 GMT

दिल्ली हाइकोर्ट ने अत्यंत गंभीर मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि अपनी ही बेटी का यौन शोषण करने वाले पिता को POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम के तहत किसी भी प्रकार की रियायत या नरमी नहीं दी जा सकती।

हाइकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा पिता को सुनाई गई सजा को बरकरार रखते हुए उसकी अपील खारिज की।

मामला

यह फैसला जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की डिवीजन बेंच ने सुनाया। मामला जुलाई 2021 का है, जब छठी कक्षा में पढ़ने वाली एक नाबालिग बच्ची ने अपने पिता पर सोते समय जबरन शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाया था।

शिकायत के समय बच्ची तीन महीने की गर्भवती थी, जिसके बाद चिकित्सा प्रक्रिया के तहत उसका गर्भपात (termination of pregnancy) कराया गया।

सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि सामाजिक दबाव या आर्थिक स्थिति के कारण पीड़िता और उसकी मां अपने बयानों से पलट गई थीं । हालांकि, अदालत ने इसे नजरअंदाज करते हुए वैज्ञानिक साक्ष्यों को प्राथमिकता दी।

बेंच ने कहा:

"इस मामले में DNA रिपोर्ट निर्णायक और अचूक सबूत है। यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध करता है कि पिता और बेटी के बीच शारीरिक संबंध थे। ऐसे में अपराध को लेकर संदेह की कोई गुंजाइश नहीं बचती।"

हाइकोर्ट ने पिता के कृत्य को "जघन्य" करार देते हुए कहा कि एक पिता का कर्तव्य अपनी बेटी की सुरक्षा और संरक्षा करना होता है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो कानून में उसके लिए कोई सहानुभूति नहीं है।

कोर्ट ने POCSO Act की धारा 29 का हवाला देते हुए कहा कि इस मामले में दोषी की संलिप्तता पूरी तरह स्पष्ट है।

अदालत ने दोषी की सजा को निलंबित करने की याचिका को भी सिरे से खारिज कर दिया, जिससे यह साफ हो गया कि पारिवारिक रिश्तों की आड़ में किए गए ऐसे अपराधों पर कानून का डंडा पूरी सख्ती से चलेगा।

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