कुंडली न मिलने का बहाना बनाकर शादी से इनकार, जबकि पहले बनाए शारीरिक संबंध और दिए बार-बार आश्वासन BNS की धारा 69 लागू: दिल्ली हाइकोर्ट

Update: 2026-02-24 09:35 GMT

दिल्ली हाइकोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति शादी का बार-बार आश्वासन देकर शारीरिक संबंध स्थापित करता है और बाद में कुंडली न मिलने का हवाला देकर विवाह से इनकार कर देता है तो यह भारतीय न्याय संहिता 2023 (BNS) की धारा 69 के तहत अपराध के दायरे में आ सकता है। यह धारा छल या झूठे आश्वासन के माध्यम से स्थापित यौन संबंध को दंडनीय ठहराती है।

जस्टिस स्वरना कांता शर्मा ने ऐसे ही एक मामले में आरोपी की नियमित जमानत याचिका खारिज की। आरोपी के विरुद्ध दुष्कर्म से संबंधित प्रावधानों के साथ-साथ BNS की धारा 69 के तहत FIR दर्ज की गई।

अभियोजन पक्ष के अनुसार पीड़िता और आरोपी कॉलेज के दिनों से संबंध में थे। वर्ष 2019 से आरोपी ने कई बार शादी का वादा कर शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता का आरोप है कि उसे परिवार से मिलवाया गया भावी पत्नी के रूप में परिचित कराया गया और अंगूठी भी पहनाई गई।

पीड़िता ने यह भी कहा कि नवंबर, 2025 में उसने एक शिकायत वापस ले ली थी क्योंकि आरोपी और उसके परिवार ने विवाह शीघ्र संपन्न कराने का आश्वासन दिया था। किंतु बाद में जून में आरोपी ने यह कहकर शादी से इनकार किया कि दोनों की कुंडली नहीं मिलती।

अदालत ने कहा,

“कुंडली पहले से मिल चुकी है, ऐसा आश्वासन देने के बाद बाद में कुंडली न मिलने का आधार लेकर विवाह से इनकार करना, प्रथम दृष्टया यह प्रश्न उठाता है कि दिया गया वादा कितना वास्तविक और सच्चा था। इस स्तर पर ऐसा आचरण BNS की धारा 69 के तहत अपराध को आकर्षित करता है, जो छल या झूठे विवाह आश्वासन के आधार पर स्थापित यौन संबंध से संबंधित है।”

अदालत ने यह भी कहा कि घटनाक्रम को केवल एक असफल संबंध के रूप में नहीं देखा जा सकता।

आदेश में कहा गया,

“यदि कुंडली मिलान आरोपी और उसके परिवार के लिए इतना निर्णायक था तो शारीरिक संबंध स्थापित करने से पहले ही यह विषय स्पष्ट कर लिया जाना चाहिए था।”

अदालत ने माना कि आरोपी ने स्वयं पीड़िता की जन्मतिथि आदि विवरण कुंडली मिलान के लिए लिए और कई बार यह भरोसा दिलाया कि कोई बाधा नहीं है। इसके बावजूद विवाह की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया और अंततः कुंडली का आधार लेकर इनकार किया गया।

इन परिस्थितियों में अदालत ने कहा कि इस चरण पर आरोपी को राहत देना उचित नहीं है। इसके साथ ही जमानत याचिका खारिज की।

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