Consumer Protection Act | RWA के खिलाफ निष्पादन कार्यवाही खारिज करने के NCDRC आदेश को चुनौती, दिल्ली हाइकोर्ट ने जारी किया नोटिस
दिल्ली हाइकोर्ट ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है जिसमें एक रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और उसके पदाधिकारियों के खिलाफ दायर निष्पादन कार्यवाही यह कहते हुए खारिज कर दी गई कि वे मूल उपभोक्ता शिकायत के पक्षकार नहीं थे।
जस्टिस गिरीश कठपालिया ने 15.09.2025 को पारित NCDRC के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 67 के संदर्भ में उठाए गए विचारणीयता के प्रश्न को नोट किया और प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।
मामले के तथ्य
याचिकाकर्ता पूरब प्रीमियम अपार्टमेंट एलॉटिज़ एसोसिएशन है, जो ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) द्वारा विकसित एक आवासीय परियोजना के अलॉटियों का प्रतिनिधित्व करती है।
इससे पहले NCDRC द्वारा तय की गई उपभोक्ता शिकायतों में GMADA के खिलाफ यह कहते हुए निर्देश जारी किए गए कि बिना वैध कम्प्लीशन सर्टिफिकेट और ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट के कब्जा प्रस्ताव अवैध है। बाद में NCDRC ने मेंटेनेंस शुल्क की शुरुआत और उसकी वसूली को लेकर भी स्पष्टीकरण जारी किया।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन निर्देशों के बावजूद GMADA ने परियोजना का रखरखाव एक रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (प्रतिवादी संख्या-1) को सौंप दिया। इसके बाद आरडब्ल्यूए ने मेंटेनेंस शुल्क के भुगतान को लेकर दबाव बनाना शुरू कर दिया और आवश्यक सेवाएं काटने की धमकी दी।
NCDRC के आदेशों के कथित उल्लंघन का आरोप लगाते हुए याचिकाकर्ता ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 72 के तहत निष्पादन आवेदन (ईए/456/2024) दायर किया और इस तरह की जबरदस्ती वाली कार्रवाइयों पर रोक लगाने की मांग की।
NCDRC का आदेश
हालांकि 15 सितंबर, 2025 के आदेश से NCDRC ने RWA और उसके पदाधिकारियों (प्रतिवादी संख्या 1 से 3) के खिलाफ निष्पादन कार्यवाही खारिज कर दी।
आयोग ने कहा कि मूल उपभोक्ता शिकायत में उनके खिलाफ कोई निर्देश नहीं थे और ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ निष्पादन कार्यवाही नहीं चलाई जा सकती, जो मुख्य मामले के पक्षकार ही नहीं थे।
दिल्ली हाइकोर्ट में चुनौती
इस आदेश से आहत होकर याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत दिल्ली हाइकोर्ट का रुख किया। हाइकोर्ट ने नोट किया कि विवादित आदेश इसी आधार पर पारित किया गया कि RWA और उसके पदाधिकारी मूल उपभोक्ता शिकायत का हिस्सा नहीं थे और डिक्री में उनके खिलाफ कोई स्पष्ट निर्देश नहीं थे।
\उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 67 के तहत याचिका की सुनवाई योग्यता पर याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि यह आदेश NCDRC द्वारा मूल उपभोक्ता शिकायत का निस्तारण करते समय पारित नहीं किया गया।
इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के पाम ग्रोव्स कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी लिमिटेड बनाम मगर गिरमे एंड गायकवाड़ एसोसिएट्स (2025) के निर्णय के पैरा 28 पर भरोसा किया गया।
इन दलीलों को संज्ञान में लेते हुए हाइकोर्ट ने आदेश दिया,
“याचिकाकर्ता द्वारा एक सप्ताह के भीतर आवश्यक कदम उठाए जाने के अधीन सभी माध्यमों से प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया जाए। नोटिस 06.04.2026 को रजिस्ट्रार के समक्ष वापसी योग्य होगा।”
मामले में आगे की सुनवाई अब नोटिस की तामील और पक्षकारों की प्रतिक्रियाओं के बाद की जाएगी।