हथियार रखने का कोई मौलिक अधिकार नहीं, आर्म्स लाइसेंस देना कार्यपालिका का विवेकाधीन अधिकार: दिल्ली हाइकोर्ट

Update: 2026-02-11 10:09 GMT

दिल्ली हाइकोर्ट ने साफ़ किया कि भारतीय संविधान के तहत किसी व्यक्ति को हथियार रखने का कोई मौलिक अधिकार प्राप्त नहीं है। कोर्ट ने कहा कि आर्म्स लाइसेंस देना पूरी तरह से आर्म्स एक्ट 1959 और आर्म्स रूल्स 2016 के तहत कार्यपालिका के विवेकाधीन क्षेत्र में आता है। इसमें अदालत अपने विचार कार्यपालिका के स्थान पर नहीं थोप सकती।

जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने यह टिप्पणी याचिका खारिज करते हुए की, जिसमें आर्म्स लाइसेंस के लिए दिए गए आवेदन को खारिज किए जाने को चुनौती दी गई थी।

याचिकाकर्ता एक पार्किंग ठेकेदार था जिसने दावा किया कि उसके द्वारा संचालित पार्किंग स्थलों पर बार-बार धमकी और हिंसा की घटनाएं होती रही हैं, जिससे उसकी जान को गंभीर खतरा है। इसी आधार पर उसने आत्मरक्षा के लिए आर्म्स लाइसेंस की मांग की थी।

हाइकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि केवल आत्मरक्षा का तर्क अपने आप में आर्म्स लाइसेंस देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हो सकता, विशेष रूप से तब जब स्थानीय पुलिस ने आर्म्स रूल्स 2016 की नियम 12 के तहत लाइसेंस जारी करने की सिफारिश ही नहीं की हो।

कोर्ट ने कहा कि नियम 12 के तहत लाइसेंसिंग प्राधिकरण का यह दायित्व है कि वह जिला मजिस्ट्रेट की सिफारिश और संबंधित पुलिस रिपोर्ट पर विचार करे और अपने स्तर पर यह संतुष्टि बनाए कि आवेदक को वास्तव में लाइसेंस की आवश्यकता है।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा,

“वैधानिक ढांचा लाइसेंसिंग प्राधिकरण को लाइसेंस देने के संबंध में व्यापक विवेकाधिकार प्रदान करता है। साथ ही यह भी निर्धारित करता है कि इस विवेक का प्रयोग किस प्रकार किया जाना है अर्थात अन्य प्राधिकरणों की रिपोर्ट पर विचार करके। ऐसा विवेक कार्यपालिका के क्षेत्र में आता है। न्यायालय कार्यपालिका के मत के स्थान पर अपना मत नहीं रख सकता।”

हाइकोर्ट ने आगे कहा,

“वर्तमान मामले में प्रतिवादी ने अधिनियम और नियमों के तहत प्रदत्त शक्तियों का अतिक्रमण नहीं किया। लाइसेंस न देने का कारण यानी पुलिस रिपोर्ट नियम 12 के अनुरूप है। इसके अतिरिक्त भारतीय संविधान के तहत हथियार रखने का कोई मौलिक अधिकार अस्तित्व में नहीं है।”

जस्टिस कौरव ने यह भी चेतावनी दी कि यदि अदालतें बड़े पैमाने पर आर्म्स लाइसेंस जारी करने के निर्देश देने लगें तो इससे समाज में अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिसे टाला जाना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर कि याचिकाकर्ता पार्किंग स्थल संचालित करता है और वहां कुछ अप्रिय घटनाएं हुई हैं, आर्म्स लाइसेंस देने का आदेश नहीं दिया जा सकता।

फैसले के अंत में कोर्ट ने कहा,

“ऐसे अनेक पार्किंग संचालक हो सकते हैं जिनके साथ कभी-कभार अप्रिय घटनाएं होती हों। लेकिन याचिकाकर्ता सहित आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य की कानून-व्यवस्था मशीनरी का दायित्व है।”

इसी आधार पर दिल्ली हाइकोर्ट ने याचिका खारिज की।

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