यौन उत्पीड़न के आरोपों के कारण JNU प्रोफेसर और कांग्रेस सांसद को नौकरी से निकाले जाने पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) प्रशासन के उस फैसले पर रोक लगाई, जिसके तहत कांग्रेस सांसद और प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम को यौन उत्पीड़न के आरोपों के चलते नौकरी से निकाल दिया गया था।
जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने नौकरी से निकाले जाने के आदेश को चुनौती देने वाली अकोइजम की याचिका पर विश्वविद्यालय को नोटिस जारी किया और मामले की सुनवाई के लिए जनवरी 2027 की तारीख तय की।
अकोइजम इनर मणिपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। वह JNU के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज में प्रोफेसर हैं।
कई छात्राओं द्वारा यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए जाने के बाद विश्वविद्यालय ने 9 अक्टूबर को उन्हें नौकरी से निकाल दिया था।
रिपोर्ट्स के अनुसार, मई में कम-से-कम 11 छात्राओं ने अकोइजम के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई थीं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने मीटिंग या किसी कार्यक्रम के बहाने छात्राओं को कैंपस स्थित अपने आवास पर बुलाया और उनका यौन उत्पीड़न करने की कोशिश की। कुछ छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने क्लास के दौरान अश्लील और अनुचित टिप्पणियां कीं।
JNU की कुलपति शांतिश्री डी. पंडित द्वारा हस्ताक्षरित बर्खास्तगी आदेश में कहा गया कि विश्वविद्यालय की 'इंटरनल कंप्लेंट कमिटी' (आंतरिक शिकायत समिति) ने इन आरोपों की जांच की और अपनी रिपोर्ट के आधार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की थी।
आदेश में कहा गया कि उचित प्रक्रिया का पालन करने, तथ्यों पर विचार करने और आंतरिक समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही उन्हें नौकरी से निकालने की सजा दी गई।
अकोइजम ने इन आरोपों से इनकार किया।
इसके बाद कांग्रेस सांसद ने विश्वविद्यालय के फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अब कोर्ट ने JNU को नोटिस जारी करते हुए बर्खास्तगी के आदेश पर रोक लगाई।