स्कीयर मनजीत को 2026 शीतकालीन ओलंपिक टीम से बाहर करना मनमाना: दिल्ली हाइकोर्ट ने IOA को लगाई फटकार
दिल्ली हाइकोर्ट ने क्रॉस-कंट्री स्कीयर मनजीत को 2026 के मिलानो–कोर्तिना शीतकालीन ओलंपिक खेलों के लिए भारतीय दल से बाहर किए जाने को मनमाना, अनुचित और अंतरराष्ट्रीय योग्यता ढांचे के विपरीत करार दिया।
हाइकोर्ट ने भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की चयन प्रक्रिया पर कड़ी टिप्पणी करते हुए मनजीत की ओलंपिक में भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जस्टिस जस्मीत सिंह ने मनजीत द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि IOA और उसकी ऐड-हॉक कमेटी ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर ऐसे पात्रता मानदंड लागू किए, जो अंतरराष्ट्रीय स्की और स्नोबोर्ड महासंघ (FIS) की योग्यता प्रणाली में निर्धारित ही नहीं हैं।
अदालत ने कहा कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह मनमानी और गैर-न्यायसंगत है।
हाइकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जिस तरह से संबंधित संस्थाओं ने इस मामले में व्यवहार किया उससे यह आभास मिलता है कि खेल उत्कृष्टता और प्रतिभा के प्रति संस्थागत उदासीनता है मानो अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में औसत प्रदर्शन ही स्वीकार्य हो।
अदालत ने कहा कि प्रतिभा तभी फल-फूल सकती है, जब उसे पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह संस्थाओं का समर्थन मिले। ओलंपिक जैसे वैश्विक मंच पर केवल खिलाड़ी ही नहीं बल्कि पूरा देश प्रतिनिधित्व करता है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करना कोई आंतरिक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय महत्व का विषय है। IOA या उसकी समितियां स्वयं को सुपर सेलेक्टर मानकर ऐसे मानदंड तय नहीं कर सकतीं, जो अंतरराष्ट्रीय योग्यता नियमों में मौजूद ही न हों और जो उन पर बाध्यकारी हों।
जस्टिस सिंह ने केंद्रीय युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह मनजीत की शीतकालीन ओलंपिक में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सभी यथोचित प्रयास करे। साथ ही IOA और उसकी ऐड-हॉक कमेटी को भी आवश्यक व्यवस्थाओं में पूर्ण सहयोग देने का आदेश दिया गया।
हाइकोर्ट ने खेल मंत्रालय के रुख पर भी असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि सार्वजनिक विश्वास का संरक्षक और खेल प्रशासन का नोडल प्राधिकरण होने के नाते मंत्रालय का यह कर्तव्य है कि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और योग्यता आधारित हो। अदालत ने कहा कि मंत्रालय एक मूक दर्शक की तरह व्यवहार नहीं कर सकता, क्योंकि खिलाड़ियों का करियर और जीवन में मिलने वाले ऐसे अवसर संस्थागत जवाबदेही पर निर्भर करते हैं।
हालांकि अदालत ने ऐड-हॉक कमेटी के गठन और कार्यप्रणाली को चुनौती देने के मुद्दे को खुला रखा है और संबंधित पक्षों को विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
मामले की अगली सुनवाई 13 अप्रैल निर्धारित की गई।