दिल्ली हाईकोर्ट ने सोशल एक्टिविस्ट और JNU की पूर्व छात्रा शहला राशिद की उस याचिका पर 26 नवंबर को फैसला सुनाने की तारीख तय की, जिसमें उन्होंने 2020 में प्रसारित कार्यक्रम को लेकर Zee News और उसके तत्कालीन एंकर सुधीर चौधरी से स्पष्ट और बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश देने की मांग की।

जस्टिस स्वर्ण कांता ने मंगलवार को कहा कि मामले में पक्षकारों की दलीलें पूरी हो चुकी हैं। इसके बाद अदालत ने याचिका को 26 नवंबर को अंतिम निपटारे के लिए सूचीबद्ध किया। अदालत ने न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (NBDSA) ZEE News और सुधीर चौधरी को अपनी लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया।

शहला राशिद ने 2022 में यह याचिका दायर की थी। मामले में 16 सितंबर 2022 को समन्वय पीठ ने नोटिस जारी किया।

याचिका में उन्होंने 31 मार्च, 2022 के NBDSA के आदेश में संशोधन की मांग की NBDSA ने अपने आदेश में माना था कि संबंधित कार्यक्रम में निष्पक्षता और वस्तुनिष्ठता का अभाव था तथा उसमें केवल एक पक्ष की बात सामने रखी गई। हालांकि प्राधिकरण ने प्रसारक को माफी प्रसारित करने का निर्देश देने से इनकार किया।

NBDSA ने ZEE NEWS को विवादित कार्यक्रम का वीडियो अपनी वेबसाइट, यूट्यूब और अन्य सभी संबंधित लिंक से हटाने का निर्देश दिया था।

मामला 30 नवंबर, 2020 को प्रसारित एक कार्यक्रम से जुड़ा है, जिसमें शहला राशिद के जैविक पिता का इंटरव्यू प्रसारित किया गया था। शहला राशिद के अनुसार, कार्यक्रम में उनके पिता ने उनके उनकी बहन और मां के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए। कार्यक्रम में शहला राशिद पर आतंकवाद के लिए धन मुहैया कराने का आरोप भी लगाया गया।

NBDSA ने 31 मार्च 2022 के अपने आदेश में कहा था कि शिकायतकर्ता के पिता को उनके खिलाफ आरोप लगाने और अपनी बात रखने का पूरा अवसर देकर चैनल ने मामले का केवल एक पक्ष प्रस्तुत किया।

शहला राशिद ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा कि माफी जारी करने से इनकार करने का कोई उचित कारण नहीं दिया गया और यह फैसला पूरी तरह मनमाना तथा कानून की दृष्टि से टिकाऊ नहीं है।

याचिका में यह भी कहा गया कि समाचार मीडिया को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में महत्वपूर्ण सार्वजनिक जिम्मेदारी निभानी होती है और समाचार चैनलों के स्व-नियमन का उद्देश्य उनकी विश्वसनीयता बनाए रखना है।

शहला राशिद का दावा है कि विवादित कार्यक्रम के वीडियो को बड़ी संख्या में लोगों ने देखा और उस पर हजारों प्रतिक्रियाएं आईं तथा सैकड़ों लोगों ने इसे शेयर किया। उनके अनुसार, केवल वीडियो हटाने से प्रसारण का सार्वजनिक प्रभाव खत्म नहीं होगा और न ही इससे उनकी प्रतिष्ठा तथा गरिमा को हुए नुकसान की भरपाई होगी।

उन्होंने हाईकोर्ट से कहा कि प्रसारण से उनकी प्रतिष्ठा को हुए नुकसान को कम करने के लिए ZEE NEWS और सुधीर चौधरी की ओर से स्पष्ट और बिना शर्त माफी जरूरी है।

अब अदालत 26 नवंबर को इस याचिका पर अंतिम फैसला करेगी।

अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Tags: