दिल्ली हाईकोर्ट ने पंतजलि आयुर्वेद लिमिटेड से जुड़ी सात कर अपीलों का निपटारा करते समय आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई।

हाईकोर्ट ने न्यायाधिकरण के आदेश में प्रक्रियागत खामियों, पारदर्शिता की कमी और अनुचित जल्दबाजी को लेकर गंभीर टिप्पणी की।

जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस रजनीश कुमार गुप्ता की पीठ ने कहा कि ITAT तथ्यों पर निर्णय देने वाली सर्वोच्च अपीलीय संस्था है लेकिन उसके आदेश में कंपनी की दलीलों और अपीलों में उठाए गए मुद्दों पर समुचित चर्चा तक नहीं की गई।

मामला आयकर विभाग के प्रधान आयुक्त की ओर से पंतजलि आयुर्वेद लिमिटेड के खिलाफ दायर सात अपीलों से संबंधित है।

हाईकोर्ट ने विशेष रूप से इस बात पर सवाल उठाया कि चार अपीलों की सुनवाई और आदेश की घोषणा 6 अगस्त 2025 को दिखाई गई, जबकि तीन अन्य अपीलों की सुनवाई और आदेश की घोषणा 13 अगस्त 2025 को हुई। इसके बावजूद सातों अपीलों के संबंध में एक ही साझा आदेश पारित किया गया।

पीठ ने कहा कि संबंधित आदेश सात से भी कम पैराग्राफ का है और उसे पढ़ने पर उसमें कोई तार्किक आधार, कारण या विवेकपूर्ण विश्लेषण समझ में नहीं आता।

अदालत ने कहा कि 6 अगस्त को जिन चार अपीलों पर सुनवाई और फैसला हुआ उनके साथ 13 अगस्त को सुनी गई तीन अन्य अपीलों को मिलाकर साझा आदेश कैसे जारी किया जा सकता है, यह समझ से परे है।

हाईकोर्ट ने ITAT के सदस्यों के रवैये पर भी कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्होंने आदेश पारित करने और उस पर हस्ताक्षर करने में अनुचित जल्दबाजी, बल्कि लापरवाही दिखाई।

अदालत ने यह भी कहा कि आदेश पर हस्ताक्षर कराए जाने के दौरान न्यायाधिकरण के कर्मचारियों ने भी इस विसंगति की ओर सदस्यों का ध्यान नहीं दिलाया।

पीठ ने कहा कि इस तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती, क्योंकि अपीलीय प्राधिकरण अपीलीय व्यवस्था के सर्वोच्च स्तर पर बैठकर तथ्यों की जांच और निर्णय करने के लिए जिम्मेदार हैं।

हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि वह पंतजलि आयुर्वेद और आयकर विभाग के बीच कर विवाद के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दे रही है। प्रक्रियागत खामियों और आदेश की स्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित ITAT आदेशों को रद्द कर दिया और कहा कि उसके पास ऐसा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

अदालत ने उन आदेशों को भी रद्द कर दिया जो सीधे तौर पर उसके सामने चुनौती के दायरे में नहीं थे। पीठ ने कहा कि ऐसा संभव है कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की ओर से निर्धारित मौद्रिक सीमा के कारण आयकर विभाग ने उन आदेशों के खिलाफ अपील नहीं की हो।

हाईकोर्ट ने सभी अपीलों को उनके मूल क्रमांक पर बहाल करते हुए ITAT को नए सिरे से सुनवाई करने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि इन मामलों की सुनवाई उस पीठ से अलग पीठ करे, जिसने विवादित आदेश पारित किया।

अदालत ने अपने आदेश की प्रति ITAT के अध्यक्ष और कानून एवं न्याय मंत्रालय के सचिव को भी सूचना के लिए भेजने का निर्देश दिया।

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