सोशल मीडिया पर ठगी के लिए सीनियर एडवोकेट विकास पाहवा की तस्वीरों के दुरुपयोग पर दिल्ली हाइकोर्ट का सख्त रुख

Update: 2026-01-20 06:52 GMT

दिल्ली हाइकोर्ट ने सीनियर एडवोकेट विकास पाहवा की तस्वीरों का सोशल मीडिया पर दुरुपयोग कर लोगों से ठगी किए जाने के मामले में अहम अंतरिम आदेश पारित किया। हाइकोर्ट ने ऐसी सभी तस्वीरों को हटाने या हटवाने का निर्देश दिया, जिनका उपयोग बिना अनुमति के किया जा रहा है।

जस्टिस ज्योति सिंह ने अंतरिम आदेश में ज्ञात और अज्ञात (जॉन डो) व्यक्तियों व संस्थाओं को निर्देश दिया कि वे सीनियर एडवोकेट विकास पाहवा की तस्वीरों का किसी भी प्रकार से अनधिकृत उपयोग कर आर्थिक लाभ न उठाएं।

सीनियर एडवोकेट विकास पाहवा की ओर से पेश एडवोकेट पीयूष कालरा ने हाइकोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल की तस्वीरें फेसबुक और इंस्टाग्राम सहित विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डाली जा रही हैं। इन तस्वीरों का इस्तेमाल लोगों को धोखा देने और ठगी करने के लिए किया जा रहा है।

कालरा ने यह भी बताया कि कुछ लेखों में भी बिना अनुमति के विकास पाहवा की तस्वीरों का प्रयोग किया गया, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंच रहा है।

हाइकोर्ट ने इस पर संक्षिप्त टिप्पणी करते हुए “स्वीकृत” कहा और सीनियर एडवोकेट को अंतरिम राहत प्रदान की।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि वह उन सभी आपत्तिजनक पोस्ट, खातों और सामग्री की सूची उपलब्ध कराएं, जिनमें तस्वीरों का दुरुपयोग किया गया ताकि इस मामले में एक विस्तृत आदेश पारित किया जा सके।

यह मामला अब 12 मार्च को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया।

गौरतलब है कि सीनियर एडवोकेट विकास पाहवा ने यह याचिका उन सभी ज्ञात और अज्ञात व्यक्तियों व संस्थाओं के खिलाफ दायर की, जो उनकी तस्वीरों का अनधिकृत रूप से इस्तेमाल कर रहे हैं। याचिका में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से आपत्तिजनक सामग्री हटाने की भी मांग की गई।

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