दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार (7 सितंबर) को स्वतंत्र भारद्वाज की 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका खारिज की। यह याचिका जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के एक किशोर कार्यकर्ता के पिता पर कथित हमले के मामले में उनकी गिरफ्तारी से जुड़ी थी।

जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की डिवीजन बेंच ने यह आदेश दिया।

भारद्वाज के वकील ने दलील दी कि एक दिन की कस्टडी भी गैर-कानूनी है। वहीं, दिल्ली पुलिस के वकील संजय लाओ ने कहा कि पुलिस रिमांड एक दिन के लिए दी गई और अगले दिन भारद्वाज को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और उन्हें ज्यूडिशियल कस्टडी (JC) में भेज दिया गया।

लाओ ने कहा,

"आज उन्हें कोर्ट में पेश किया गया और 14 दिन की न्यायिक रिमांड दी गई। जब कानूनी आदेश है, तो वे उसे वहां चुनौती दे सकते हैं। इसमें हेबियस कॉर्पस का सवाल कहां उठता है?"

इस बीच कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा,

"उनका (भारद्वाज के वकील का) कहना है कि एससी के आदेश के अनुसार, यह FIR रद्द कर दी गई। कृपया हमें कन्फर्म करें कि इसे रद्द किया गया या नहीं। अगर इसे रद्द कर दिया गया है तो उन्हें कस्टडी में क्यों रखा जाए?"

शिकायतकर्ता की ओर से वकील स्वाति खन्ना पेश हुईं और कहा कि यह SC/ST Act के तहत दर्ज FIR है। वहीं, भारद्वाज के वकील ने कहा कि FIR में खुद CJP विरोध प्रदर्शन का जिक्र है।

कोर्ट को यह भी बताया गया कि SC/ST Act के प्रावधान बाद में जोड़े गए। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की इस दलील पर भी ध्यान दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर को इस FIR को रद्द कर दिया।

हालांकि, कोर्ट ने गौर किया कि भारद्वाज के वकील ने याचिका में यह बात नहीं कही।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा,

"अगर हम नोटिस जारी भी करते तो वे क्या जवाब दाखिल करते?"

वहीं, लाओ ने दलील दी कि यह उन FIR में से नहीं है, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया था। उन्होंने बताया कि भारद्वाज को शनिवार को पेश किया गया, जहां उसे एक दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया; इतवार को उसे एक दिन की ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजा गया था; और सोमवार को उसे संबंधित कोर्ट में पेश किया गया और 14 दिन की ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया गया।

कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए अपने आदेश में कहा,

"जांच करने पर पता चला कि याचिकाकर्ता ने यह आधार उठाया कि FIR रद्द कर दी गई, इसलिए याचिकाकर्ता की हिरासत गैर-कानूनी है। याचिका में यह आधार नहीं उठाया गया... मिस्टर लाओ का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने यह FIR रद्द नहीं की। हम यह नोट कर सकते हैं कि FIR 91/2026 की कॉपी याचिकाकर्ता को नहीं दी गई। हमें समझ नहीं आ रहा है कि 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) रिट में यह मांग कैसे की जा रही है।"

भारद्वाज के वकील एडवोकेट उमेश शर्मा के अनुरोध पर सोमवार को इस मामले को तत्काल सुनवाई के लिए लिस्ट किया गया और सुना गया। यह याचिका उनके पिता रणधीर कुमार झा के माध्यम से दायर की गई।

भारद्वाज को इतवार को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। शनिवार को उसे एक दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया। सोमवार को उसे 14 दिन की और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और अब उसे 21 सितंबर को संबंधित जज के सामने पेश किया जाएगा।

भारद्वाज को शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में हिरासत में लिया गया था। इससे कुछ घंटे पहले ही CJP ने इस मामले में उनकी गिरफ्तारी की मांग करते हुए पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था।

दिल्ली पुलिस ने नाबालिग एक्टिविस्ट के पिता पर कथित हमले को लेकर भारद्वाज के खिलाफ FIR में SC/ST (अत्याचार निवारण) Act और आपराधिक धमकी देने की धाराएं जोड़ी थीं। उसके खिलाफ POCSO का मामला भी दर्ज किया गया।

भारद्वाज तब जांच के दायरे में आए, जब एक वीडियो पॉडकास्ट में CJP प्रदर्शनकारी के पिता पर हमले के बारे में उनके दावे वायरल हो गए। वीडियो में उन्होंने दावा किया था कि उनकी राजनीतिक पहुंच है।

Title: SWATANTRA BHARDWAJ THROUGH HIS FATHER RANDHIR KUMAR JHA v. STATE GOVT OF NCT OF DELHI AND ORS

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