चेक बाउंस मामला: दिल्ली हाइकोर्ट ने एक्टर राजपाल यादव को आत्मसमर्पण का आदेश दिया, समझौते के उल्लंघन पर कड़ी फटकार

Update: 2026-02-03 09:37 GMT

दिल्ली हाइकोर्ट ने चेक बाउंस से जुड़े मामलों में बार-बार अदालत को दिए गए आश्वासनों का पालन न करने पर बॉलीवुड अभिनेता राजपाल नौरंग यादव के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है।

हाइकोर्ट ने राजपाल यादव को 4 फरवरी तक संबंधित जेल अधीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।

जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने एक्टर के आचरण पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि उनका व्यवहार निंदनीय है। कोर्ट ने कहा कि बार-बार अवसर दिए जाने और काफी उदारता दिखाए जाने के बावजूद राजपाल यादव शिकायतकर्ता कंपनी एम/एस मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को भुगतान करने में असफल रहे।

हाइकोर्ट ने कहा,

“यह अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि याचिकाकर्ता नंबर 1 (राजपाल यादव) का आचरण निंदनीय है। बार-बार आश्वासन देने और अदालत से रियायत मांगने के बावजूद उन्होंने समय-समय पर पारित आदेशों का पालन नहीं किया।”

यह मामला राजपाल यादव और उनकी पत्नी द्वारा दायर उन याचिकाओं से जुड़ा है, जिनमें उन्होंने परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत हुई सजा को चुनौती दी थी। ट्रायल कोर्ट ने दोनों को छह महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई थी।

28 जून, 2024 को हाइकोर्ट की एक अन्य पीठ ने यह कहते हुए सजा पर रोक लगा दी थी कि यादव दंपति कोई आदतन अपराधी नहीं हैं और वे शिकायतकर्ता कंपनी के साथ आपसी समझौते की संभावना तलाशना चाहते हैं। इसके बाद मामला मध्यस्थता के लिए भेजा गया।

हाइकोर्ट ने अपने आदेश में घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि जून, 2024 से अब तक राजपाल यादव लगातार भुगतान के लिए समय मांगते रहे लेकिन हर बार अपने वादे से मुकरते रहे। उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया था कि कुल 2.5 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा, जिसमें 40 लाख रुपये और 2.10 करोड़ रुपये अलग-अलग किश्तों में शामिल थे, लेकिन तय समयसीमा के भीतर राशि जमा नहीं की गई।

जस्टिस शर्मा ने कहा कि न तो रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष डिमांड ड्राफ्ट जमा किए गए और न ही ड्राफ्ट में कथित त्रुटि को सुधारने के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया।

अदालत ने यह भी नोट किया कि कथित टाइपिंग त्रुटि का बहाना भरोसे के लायक नहीं है, क्योंकि अभिनेता को इस त्रुटि की जानकारी पहले से थी फिर भी उन्होंने केवल तारीखें मांगीं।

कोर्ट ने कहा कि अब तक न तो 40 लाख रुपये जमा किए गए हैं और न ही 2.10 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जबकि 2.5 करोड़ रुपये के भुगतान का आश्वासन काफी पहले दिया जा चुका था।

अदालत ने यह भी कहा कि जब याचिकाकर्ता स्वयं अपनी देनदारी स्वीकार कर चुका है तो बार-बार दी जा रही रियायत को जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है। इसके साथ ही हाइकोर्ट ने निर्देश दिया कि पहले से जमा की गई राशि शिकायतकर्ता कंपनी को जारी की जाए।

हालांकि न्याय के हित में हाइकोर्ट ने राजपाल यादव को 4 फरवरी, 2026 को शाम 4 बजे तक संबंधित जेल अधीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण करने की अनुमति दी ताकि वे ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा भुगत सकें। यह आदेश एक्टर के वकील के अनुरोध पर दिया गया, जिन्होंने बताया कि राजपाल यादव फिलहाल मुंबई में पेशेवर काम में व्यस्त हैं।

मामले की अगली सुनवाई 5 फरवरी, 2026 को निर्धारित की गई, जिसमें जेल अधीक्षक से अनुपालन रिपोर्ट मांगी जाएगी।

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