दिल्ली हाईकोर्ट ने एक युवा वकील की अच्छी तैयारी के लिए तारीफ़ की, कहा- सीनियर वकीलों को जूनियर्स को बहस करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए
दिल्ली हाईकोर्ट ने केस की फ़ाइल और रिकॉर्ड की अच्छी जानकारी रखने के लिए एक युवा वकील की तारीफ़ की। कोर्ट ने कहा कि जूनियर वकीलों को मामलों पर बहस करने के लिए तैयार रहना चाहिए और सीनियर वकीलों को उन्हें केस पेश करने से नहीं रोकना चाहिए।
जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस निवेदिता अनिल शर्मा की डिवीज़न बेंच ने यह टिप्पणी तब की, जब वे ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) की एक याचिका खारिज कर रहे थे। AIIMS ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के उस आदेश को चुनौती दी, जो OBC-NCL कैटेगरी के तहत 'ड्राइवर ऑर्डिनरी ग्रेड' पद के उम्मीदवार की नियुक्ति से जुड़ा था।
कोर्ट गिरधारी लाल जाखड़ की उम्मीदवारी पर विचार कर रहा था, जिन्होंने 'ड्राइवर ऑर्डिनरी ग्रेड' पद के लिए सिलेक्शन प्रोसेस में 200 में से 161 अंक हासिल किए और पांचवां स्थान प्राप्त किया।
AIIMS ने उनकी उम्मीदवारी इस आधार पर खारिज की कि उनके द्वारा पेश किया गया OBC-NCL सर्टिफिकेट 1 अप्रैल, 2020 और 31 मार्च, 2021 के बीच जारी नहीं किया गया, जैसा कि भर्ती के विज्ञापन में ज़रूरी है।
कोर्ट ने गौर किया कि AIIMS ने सर्टिफिकेट जारी करने वाले अधिकारी की योग्यता, सर्टिफिकेट की असलियत या उसमें बताई गई बातों की सच्चाई पर कोई सवाल नहीं उठाया।
कोर्ट ने यह भी देखा कि जाखड़ की योग्यता और OBC-NCL उम्मीदवार के तौर पर विचार किए जाने के उनके अधिकार को लेकर कोई असली विवाद नहीं है।
कोर्ट ने आगे कहा कि AIIMS ने खुद 7 सितंबर, 2022 के अपने कम्युनिकेशन के ज़रिए जाखड़ को वैलिड OBC-NCL सर्टिफिकेट पेश करने के लिए 15 दिन का समय दिया।
इसके बाद जाखड़ ने 13 सितंबर, 2022 का एक सर्टिफिकेट पेश किया, जिसमें बताया गया कि वे फाइनेंशियल ईयर 2020-21 के लिए OBC-NCL कैटेगरी में आते हैं।
बेंच ने कहा कि सिर्फ़ इसलिए सर्टिफिकेट खारिज करना गलत होगा कि वह तय समय के बाद जारी किया गया, खासकर तब जब AIIMS ने खुद सर्टिफिकेट पेश करने का समय बढ़ाया और रेस्पॉन्डेंट ने बढ़े हुए समय के अंदर ही उसे पेश किया था।
कोर्ट ने कहा,
“इस आधार पर सर्टिफिकेट को खारिज करना गलत होगा कि इसे 1 अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2021 के बीच जारी नहीं किया गया, जबकि यह समय-सीमा एक्सटेंशन लेटर जारी होने से डेढ़ साल से भी पहले की थी।”
कोर्ट ने यह भी माना कि सर्टिफिकेट हासिल करना झाखर के बस में नहीं था और उस दौरान COVDI-19 महामारी अपने चरम पर थी।
कोर्ट ने कहा कि उस समय उम्मीदवारों से ऐसे सर्टिफिकेट हासिल करने की उम्मीद करना अवास्तविक होगा, जब शहर के अंदर भी यात्रा करना मुश्किल था।
बेंच ने आगे कहा कि जाखड ने जो सर्टिफिकेट पेश किया, वह फाइनेंशियल ईयर 2020-21 का था, इसलिए उस फाइनेंशियल ईयर के लिए उनके OBC-NCL स्टेटस को साबित करने की ज़रूरत को पूरा करता था।
AIIMS की ओर से पेश वकील की तारीफ़ करते हुए कोर्ट ने कहा कि जब सीनियर वकील आनंद वर्मा किसी दूसरे मामले में बहस कर रहे थे, तब जूनियर वकील आयुष गुप्ता ने खुद केस की बहस की और उन्हें रिकॉर्ड की पूरी जानकारी थी।
कोर्ट ने गौर किया कि जब वर्मा बाद में कार्यवाही में शामिल हुए तो उन्होंने मामले को अपने हाथ में नहीं लिया, बल्कि ज़रूरत पड़ने पर गुप्ता की मदद की।
बेंच ने कहा,
“सीनियर और जूनियर वकीलों से हम यही उम्मीद करते हैं। जूनियर वकील को तैयार रहना चाहिए और सीनियर वकील को जूनियर को केस पेश करने से हतोत्साहित नहीं करना चाहिए। हम मिस्टर गुप्ता और मिस्टर वर्मा की तारीफ़ करते हैं। इससे हमें उम्मीद मिलती है।”
Case Title : ALL INDIA INSTITUTE OF MEDICAL SCIENCES v. GIRDHARI LAL JAKHAR