दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्म 'मिर्जापुर: द मूवी' में 'शूरवीर' संगीत रचना के इस्तेमाल को चुनौती देने वाली जनहित याचिका का निपटारा कर दिया।

फिल्म के निर्माता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि गाने को फिल्म से हटा दिया गया।

इस पर कोर्ट ने कहा कि याचिका में उठाया गया मुद्दा सुलझ चुका है, इसलिए अब किसी अन्य आदेश की आवश्यकता नहीं है।

एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव सांब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की खंडपीठ ने निर्माता की ओर से दी गई जानकारी को स्वीकार किया कि 17 सितंबर से फिल्म में यह गाना नहीं बजाया जा रहा है।

याचिकाकर्ता प्रशांत कुमार सिंह ने अदालत से संबंधित अधिकारियों को फिल्म के क्लाइमेक्स दृश्य में बैकग्राउंड म्यूजिक के तौर पर इस्तेमाल की गई इस संगीत रचना को हटाने का निर्देश देने की मांग की थी।

याचिका में कहा गया कि 'शूरवीर' संगीत रचना महाराणा प्रताप और उनके अनुयायियों के वीरतापूर्ण आचरण से जुड़ी है। सुनवाई के दौरान निर्माता की ओर से पेश वकील ने बताया कि गाने को स्वेच्छा से फिल्म से हटा दिया गया। इसके समर्थन में हटाए जाने की पुष्टि करने वाला प्रमाणपत्र भी कोर्ट के समक्ष पेश किया गया। याचिकाकर्ता के वकील ने इस तथ्यात्मक दावे पर कोई आपत्ति नहीं जताई।

इसके बाद हाईकोर्ट ने कहा,

“इस पृष्ठभूमि में, याचिकाकर्ता के वकील के अनुरोध के अनुसार, चूंकि याचिका में उठाया गया मुद्दा सुलझ चुका है, इसलिए किसी अन्य आदेश की आवश्यकता नहीं है।”

सुनवाई के दौरान निर्माता की ओर से यह भी कहा गया कि संबंधित अधिकारियों के आचरण को देखते हुए एक सप्ताह के भीतर स्वेच्छा से आर्मी वेलफेयर फंड में 50,000 रुपये दान किए जाएंगे।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि दान की राशि जमा किए जाने की पावती अदालत के रिकॉर्ड पर रखी जाए।

पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि आज से दो सप्ताह के भीतर दान की पावती पेश नहीं की जाती है, तो मामले को केवल इस सीमित मुद्दे पर दोबारा विचार के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा कि प्रतिवादी संख्या तीन पर कितना जुर्माना लगाया जाना चाहिए।

हालांकि, यदि पावती रिकॉर्ड पर पेश कर दी जाती है, तो जनहित याचिका के निपटारे का आदेश ही मामले की आगे की कार्यवाही पर लागू होगा।

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