दिल्ली में पनीर के नाम पर नॉन-डेयरी उत्पादों की बिक्री का आरोप, हाईकोर्ट ने केंद्र, FSSAI और दिल्ली सरकार से मांगा जवाब
दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी में पनीर के नाम पर डेयरी एनालॉग्स (Dairy Analogues) और नॉन-डेयरी उत्पादों की कथित बिक्री पर खाद्य सुरक्षा मानकों के प्रभावी अनुपालन की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर बुधवार को नोटिस जारी किया।
कार्यवाहक चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव सांबरे और जस्टिस संजय शर्मा की खंडपीठ ने केंद्र सरकार, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI), दिल्ली सरकार और उसके खाद्य सुरक्षा विभाग से जवाब मांगा है।
'रेस्तरां में पनीर ऑर्डर करने पर ग्राहक को असली डेयरी उत्पाद मिलने की उम्मीद होती है'
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि जब कोई ग्राहक होटल या रेस्तरां में पनीर का व्यंजन ऑर्डर करता है, तो उसकी स्वाभाविक अपेक्षा होती है कि उसे दूध से बना पनीर ही परोसा जाएगा, न कि कोई दूसरा विकल्प।
वकील ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में उपभोक्ता के लिए यह जानने का कोई प्रभावी तरीका नहीं है कि उसके खाने में इस्तेमाल किया गया उत्पाद वास्तव में दूध से बना पनीर है या किसी अन्य संरचना वाला डेयरी एनालॉग।
उन्होंने कहा कि ऐसे उत्पाद दिखने और स्वाद में पनीर जैसे हो सकते हैं, लेकिन उनकी वास्तविक संरचना के बारे में उपभोक्ता को जानकारी नहीं दी जाती।
खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का आरोप
अदालत के यह पूछने पर कि इस मामले में किन वैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है, याचिकाकर्ता की ओर से खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और FSSAI के 2011 के नियमों का हवाला दिया गया।
वकील ने दलील दी कि पनीर एक मानकीकृत डेयरी उत्पाद है, जबकि डेयरी एनालॉग्स में पूरी तरह या आंशिक रूप से गैर-दूध स्रोतों से प्राप्त सामग्री हो सकती है।
याचिका में कहा गया कि चुनौती हर उस डेयरी एनालॉग को नहीं है, जिसका कानूनी रूप से निर्माण किया जाता है, बल्कि उन उत्पादों को लेकर है जिन्हें उनकी वास्तविक प्रकृति का पर्याप्त खुलासा किए बिना पनीर के रूप में बेचा, परोसा या पेश किया जाता है।
रेस्तरां और क्लाउड किचन में पारदर्शिता की मांग
जनहित याचिका में कहा गया कि होटल, रेस्तरां, कैटरर्स, भोजनालयों और क्लाउड किचन में पनीर से बने व्यंजन ऑर्डर करने वाले ग्राहकों के पास यह जानने का व्यावहारिक तरीका नहीं होता कि भोजन में असली पनीर का इस्तेमाल हुआ है या किसी नॉन-डेयरी विकल्प का।
याचिका के अनुसार, उत्पाद की वास्तविक संरचना का खुलासा नहीं करना उपभोक्ताओं को गुमराह करने और खाद्य सुरक्षा संबंधी वैधानिक प्रावधानों के अनुपालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी दलील दी कि असली पनीर प्रोटीन का स्रोत है, जबकि कुछ एनालॉग उत्पादों की पोषण संरचना अलग हो सकती है।
नवरात्रि और दशहरे के मद्देनजर तत्काल राहत की मांग
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने नवरात्रि और दशहरे के त्योहारों का हवाला देते हुए अंतरिम राहत की मांग की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को पनीर के नमूने लेने और उनकी जांच करने का निर्देश देने की अपील की।
हालांकि, हाईकोर्ट ने फिलहाल इस संबंध में कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया।
अन्य राज्यों में उठाए गए कदमों का भी हवाला
याचिका में महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब और छत्तीसगढ़ में डेयरी एनालॉग्स या नॉन-डेयरी पनीर को लेकर उठाए गए नियामक कदमों का उल्लेख किया गया है।
इसमें पंजाब के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा एक निर्धारित अवधि के लिए एनालॉग या नॉन-डेयरी पनीर पर प्रतिबंध लगाने संबंधी आदेश और अन्य राज्यों में जारी नियामक निर्देशों का भी हवाला दिया गया है।
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि अगस्त 2026 में दिल्ली के ओखला सब्जी मंडी क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा विभाग ने संदिग्ध या मिलावटी पनीर के खिलाफ कार्रवाई की थी, जिसमें लगभग 508 किलोग्राम उत्पाद नष्ट किया गया।
याचिका में क्या मांग की गई है?
जनहित याचिका में संबंधित अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई है कि दिल्ली में डेयरी एनालॉग्स या नॉन-डेयरी उत्पादों को पनीर बताकर बनाने, आपूर्ति करने, बेचने या परोसने से रोका जाए।
इसके अलावा, याचिका में पनीर और संबंधित उत्पादों की निगरानी, निरीक्षण, नमूना संग्रह और प्रयोगशाला जांच के लिए समन्वित व्यवस्था बनाने की मांग की गई है, ताकि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जा सके।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी आग्रह किया है कि रेस्तरां और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में ग्राहकों को परोसे जाने वाले उत्पाद की वास्तविक प्रकृति और संरचना के बारे में सही जानकारी मिलनी चाहिए।
फिलहाल, हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है और मामले में कोई अंतरिम राहत नहीं दी है।