उन्नाव दुष्कर्म मामले में कुलदीप सेंगर की दलील- मैं लोकसेवक नहीं, फिर भी कठोर सजा दी गई
उन्नाव दुष्कर्म मामले में दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को चुनौती देते हुए पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा कि उन्हें लोकसेवक मानकर कठोर सजा दी गई, जबकि वह कानून की उस परिभाषा में नहीं आते।
मंगलवार को जस्टिस प्रतिभा सिंह और जस्टिस मधु जैन की खंडपीठ सेंगर की अपील पर सुनवाई कर रही थी।
सुनवाई के दौरान सेंगर की ओर से सीनियर एडवोकेट एन. हरिहरन ने कहा कि पीड़िता की उम्र ऐसी नहीं थी कि मामला POCSO कानून के दायरे में आए। उन्होंने यह भी कहा कि पीड़िता की गवाही उच्च विश्वसनीयता वाली नहीं थी।
सुनवाई की शुरुआत में अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि सेंगर को अपनी अपील के गुण-दोष पर बहस करनी चाहिए।
वहीं पीड़िता की ओर से एडवोकेट महमूद प्राचा ने कहा कि इस अपील में ऐसा कुछ विशेष नहीं है कि इसे अन्य मामलों से अलग प्राथमिकता देकर सुना जाए।
इस पर सेंगर की ओर से कहा गया कि वह लगभग दस वर्षों से जेल में हैं और यही इस मामले की विशेष परिस्थिति है।
अदालत ने कहा कि चूंकि सेंगर हिरासत में हैं और वह पूरी अपील पर अंतिम सुनवाई चाहते हैं। इसलिए मामले की शीघ्र सुनवाई की जाएगी।
बहस के दौरान सेंगर के वकील ने कहा कि शुरुआत में उनके खिलाफ आपराधिक साजिश, अपहरण और दुष्कर्म से जुड़ी धाराओं में आरोप तय हुए थे। बाद में POCSO Act की धाराएं जोड़ी गईं और उसके बाद “लोकसेवक” वाला आरोप शामिल किया गया।
उन्होंने अदालत से कहा,
“मुझे धारा 376(1) के तहत आरोपित किया गया, लेकिन सजा धारा 376(2) के तहत दी गई, जो लोकसेवक से संबंधित है। मैं उस आरोप में आरोपित ही नहीं था।”
वकील ने कहा कि सेंगर बंगरमऊ क्षेत्र से विधायक थे, जबकि कथित घटना सफीपुर क्षेत्र में हुई थी। उन्होंने तर्क दिया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 21 में विधायक को लोकसेवक की परिभाषा में शामिल नहीं किया गया।
उन्होंने अदालत से कहा कि जिस आरोप में अभियोजन नहीं चला, उसी आधार पर उन्हें सबसे कठोर सजा दी गई।
सेंगर की ओर से यह भी कहा गया कि उनके पक्ष में पेश अलीबी को मोबाइल टावर रिकॉर्ड की गलत व्याख्या के आधार पर खारिज किया गया।
अदालत ने मामले की सुनवाई जुलाई 2026 में तय की। अदालत ने निर्देश दिया कि सेंगर और CBI दोनों को प्रारंभिक दलीलों के लिए दो-दो घंटे दिए जाएंगे, जबकि जवाबी बहस के लिए एक-एक घंटे का समय मिलेगा।
मामले की अगली सुनवाई 6 से 8 जुलाई, 2026 के बीच दोपहर बाद होगी।
उल्लेखनीय है कि विशेष CBI अदालत ने वर्ष 2019 में सेंगर को दुष्कर्म और अपहरण मामले में दोषी ठहराते हुए शेष जीवन तक के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उन पर 25 लाख रुपये का जुर्माना और पीड़िता की मां को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया गया था।इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट की समन्वय पीठ ने दिसंबर 2025 में सेंगर की सजा निलंबित कर उन्हें जमानत दी थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने बाद में उस आदेश पर रोक लगा दी थी और मई 2026 में मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए वापस हाईकोर्ट भेज दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हाईकोर्ट को सजा निलंबन के मुद्दे पर दोबारा विचार करना चाहिए।
उन्नाव दुष्कर्म मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना था। पीड़िता और उसके परिवार ने सेंगर और उनके सहयोगियों पर लगातार धमकाने और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। मामले से जुड़े अन्य प्रकरणों की भी CBI ने जांच की थी।