उन्नाव रेप केस: कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाइकोर्ट से बड़ा झटका, सजा निलंबित करने की याचिका दूसरी बार खारिज

Update: 2026-01-19 12:02 GMT

दिल्ली हाइकोर्ट ने सोमवार (19 जनवरी 2026) को उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबित करने की याचिका खारिज की। सेंगर इस मामले में 10 साल की सजा काट रहा है और उसने अपनी सजा को स्थगित करने की गुहार लगाई थी।

जस्टिस रविंदर डुडेजा की पीठ ने याचिका यह कहते हुए खारिज की कि सेंगर के आपराधिक इतिहास और मामले की परिस्थितियों में ऐसा कोई नया बदलाव नहीं आया, जिसके आधार पर उसे राहत दी जा सके।

पूरा मामला

यह मामला अप्रैल 2018 का है, जब उन्नाव की नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता का परिवार अदालत की सुनवाई के लिए जा रहा था। इस दौरान पीड़िता के पिता पर आरोपियों ने दिन-दहाड़े जानलेवा हमला किया। अगले ही दिन पुलिस ने उल्टा पीड़िता के पिता को ही अवैध हथियार रखने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। पुलिस हिरासत में रहते हुए गंभीर चोटों के कारण उनकी मौत हो गई।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अगस्त, 2019 में इस मामले से जुड़े सभी पांच केस उत्तर प्रदेश से दिल्ली ट्रांसफर कर दिए गए। दिसंबर, 2019 में सेंगर को दुष्कर्म का दोषी पाकर उम्रकैद की सजा सुनाई गई। इसके बाद 4 मार्च 2020 को उसे पीड़िता के पिता की मौत की साजिश रचने का भी दोषी पाया गया और 10 साल की सजा दी गई।

हाइकोर्ट का कड़ा रुख

सेंगर ने जून, 2024 में भी अपनी सजा निलंबित करने की कोशिश की, जिसे अदालत ने नामंजूर कर दिया। यह उसकी दूसरी कोशिश थी।

जस्टिस डुडेजा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि हालांकि सेंगर लगभग 7.5 वर्षों से जेल में है, लेकिन उसकी अपील पर अंतिम सुनवाई में देरी का एक मुख्य कारण खुद उसकी ओर से बार-बार सजा निलंबन के लिए आवेदन दाखिल करना भी रहा है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि अब इस अपील पर केवल गुण-दोष (Merits) के आधार पर जल्द-से-जल्द सुनवाई होनी चाहिए। गौरतलब है कि हाल ही में हाइकोर्ट की एक खंडपीठ ने सेंगर की दुष्कर्म मामले वाली उम्रकैद की सजा निलंबित की थी, लेकिन कुछ ही दिनों बाद सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश पर रोक लगा दी थी।

जस्टिस रविंदर डुडेजा की महत्वपूर्ण टिप्पणी:

अदालत ने कहा कि आरोपी के पिछले रिकॉर्ड और अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसे फिलहाल कोई राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने निर्देश दिया कि मुख्य अपील पर त्वरित गति से सुनवाई की जाए ताकि मामले का अंतिम निपटारा हो सके। इस फैसले के बाद कुलदीप सिंह सेंगर को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।

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