चीनी वीज़ा घोटाला मामला: कार्ति चिदंबरम के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश को चुनौती पर दिल्ली हाइकोर्ट ने जारी किया नोटिस

Update: 2026-01-28 10:51 GMT

दिल्ली हाइकोर्ट ने कांग्रेस सांसद कार्ति पी. चिदंबरम द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने चीनी वीज़ा घोटाला मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा उनके खिलाफ आरोप तय किए जाने के आदेश को चुनौती दी। यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा जांचाधीन है।

बुधवार को जस्टिस मनोज जैन ने कुछ समय तक मामले की सुनवाई के बाद आदेश सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने 23 दिसंबर 2025 के उस आदेश को चुनौती दी, जिसके तहत उन्हें मुकदमे का सामना करने का निर्देश दिया गया। कोर्ट ने रिकॉर्ड किया कि आरोपों को चुनौती देने का मुख्य आधार यह है कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 8 और 9 तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 204 के आवश्यक तत्व पूरी तरह से अनुपस्थित हैं। यह भी दलील दी गई कि न तो किसी प्रकार की मांग और न ही किसी रिश्वत की स्वीकृति का कोई संकेत मौजूद है।

हाइकोर्ट ने CBI के विशेष लोक अभियोजक को नोटिस जारी करते हुए संक्षिप्त जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया और कहा कि अगली सुनवाई से पहले स्थिति रिपोर्ट दाखिल की जाए। कोर्ट ने स्थगन आवेदन पर भी नोटिस जारी किया। साथ ही यह भी रिकॉर्ड किया गया कि ट्रायल कोर्ट में अगली तारीख 4 फरवरी तय है, जहां दस्तावेज़ों के स्वीकार या अस्वीकार पर कार्यवाही होनी है।

याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने प्रारंभिक दलील देते हुए कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 204 के तहत आरोप लगाने के लिए कोई सामग्री उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि न तो आरोप पत्र में इस धारा के तहत कोई मामला बनता है और न ही रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य है, जिसके आधार पर यह आरोप तय किया जा सके।

लूथरा ने यह भी तर्क दिया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 8 और 9 के तहत आरोप बिना किसी लोक सेवक की संलिप्तता के टिक नहीं सकते। उन्होंने कहा कि अभियोजन का पूरा मामला एक कथित सरकारी गवाह के बयानों, कुछ ई-मेल और अनुमान पर आधारित है। उनके अनुसार, याचिकाकर्ता के खिलाफ एकमात्र सामग्री यह है कि एक ई-मेल उन्हें भेजा गया, जिसका उन्होंने कोई जवाब तक नहीं दिया।

इस पर हाइकोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि फिलहाल कार्यवाही पर रोक नहीं लगाई जा सकती और पहले CBI से संक्षिप्त जवाब मंगाया जाएगा। CBI की ओर से विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि ट्रायल कोर्ट में अगली तारीख केवल दस्तावेज़ों के औपचारिक चरण के लिए तय है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा, जस्टिस अनुप जयराम भंभानी और जस्टिस गिरीश काठपालिया इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर चुके हैं।

स्पेशल CBI जज ने इस मामले में कार्ति चिदंबरम सहित सात अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए, जबकि एक आरोपी को मामले से मुक्त कर दिया गया। कार्ति चिदंबरम ने अपनी याचिका में कहा कि उनके खिलाफ न तो कोई संदेह और न ही गंभीर संदेह का कोई आधार है, जिससे मुकदमा चलाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि उन पर 50 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का जो निष्कर्ष ट्रायल कोर्ट ने निकाला है, वह रिकॉर्ड से समर्थित नहीं है।

यह मामला वर्ष 2011 का है, जब कार्ति चिदंबरम के पिता पी. चिदंबरम देश के गृह मंत्री थे। आरोप है कि उस दौरान 263 चीनी नागरिकों को परियोजना वीज़ा जारी किए गए। CBI के अनुसार, वेदांता समूह की सहायक कंपनी तलवंडी साबो पावर लिमिटेड ने पंजाब में एक ताप विद्युत परियोजना के लिए चीनी कंपनी के विशेषज्ञों हेतु अतिरिक्त वीज़ा की आवश्यकता होने पर कथित रूप से 50 लाख रुपये की रिश्वत दी।

CBI का आरोप है कि यह राशि एक आपराधिक साजिश के तहत दी गई और ई-मेल के माध्यम से हुई बातचीत इसके समर्थन में दस्तावेज़ी साक्ष्य है। एजेंसी का यह भी कहना है कि वीज़ा नियमों से कथित विचलन गृह सचिव और गृह मंत्री की स्वीकृति से हुआ।

हाइकोर्ट ने मामले को अगली सुनवाई के लिए 12 फरवरी को सूचीबद्ध किया।

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