दिल्ली हाईकोर्ट ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन की इजाज़त न मिलने पर IYC की अर्ज़ी पर तुरंत सुनवाई से किया इनकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) की उस अर्ज़ी पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार किया, जिसमें जंतर-मंतर पर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की इजाज़त न मिलने को चुनौती दी गई थी।
IYC की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट संजय घोष ने कहा कि याचिका में मौजूद सभी कमियां दूर कर ली गई हैं और कोर्ट ने उनसे कहा था कि अगर मामला लिस्ट नहीं होता है तो वे आज फिर से इस मामले का ज़िक्र करें।
हालांकि, शुक्रवार को तुरंत सुनवाई की मांग को खारिज करते हुए एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव सांब्रे की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने कहा,
"नहीं। हम इस पर सोमवार को सुनवाई करेंगे।"
यह अर्ज़ी IYC के अध्यक्ष उदय भानु चिब ने दायर की।
गुरुवार को, इस अर्ज़ी का ज़िक्र ACJ के सामने किया गया था, जिन्होंने कहा था कि अर्ज़ी 24 घंटे के भीतर लिस्ट कर दी जाएगी और अगर ऐसा नहीं होता है तो वकील मामले का फिर से ज़िक्र कर सकते हैं (शुक्रवार को)। चूंकि मामला लिस्ट नहीं हुआ था इसलिए आज फिर से इसका ज़िक्र किया गया।
याचिका में तर्क दिया गया कि पुलिस शांतिपूर्ण सभा को रेगुलेट करने की अपनी शक्ति को बिना किसी व्यक्तिगत और उचित आकलन के उसे रोकने की शक्ति में नहीं बदल सकती।
IYC ने 25 सितंबर को दिल्ली पुलिस के पास लगभग 100-150 लोगों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए आवेदन किया था।
ऐसा करते समय उसने सुरक्षा, ट्रैफिक, अनुशासन और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी सभी कानूनी शर्तों का पालन करने का भरोसा दिया।
हालांकि, याचिका में कहा गया कि बार-बार फॉलो-अप करने के बावजूद आवेदन खारिज करने की जानकारी 1 अक्टूबर को दी गई, जो विरोध प्रदर्शन की पहली प्रस्तावित तारीख थी।
याचिका में भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(a) और 19(1)(b) का हवाला दिया गया और विरोध प्रदर्शन से जुड़े दिशानिर्देशों के कथित यांत्रिक (बिना सोचे-समझे) इस्तेमाल को चुनौती दी गई।
इसमें सुप्रीम कोर्ट के उन स्थापित फैसलों का भी सहारा लिया गया है जो शांतिपूर्ण सभा के अधिकार की रक्षा करते हैं और उचित रेगुलेशन की मांग करते हैं।
यह अर्ज़ी एडवोकेट रूपेश सिंह भदौरिया के ज़रिए दायर की गई।