दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि कोर्ट के स्टाफ और वकीलों को सर्दियों के दौरान वाहनों के प्रवेश पर लगी उन पाबंदियों से छूट मिलेगी, जो राष्ट्रीय राजधानी के बाहर रजिस्टर्ड और BS-VI एमिशन स्टैंडर्ड से नीचे वाले वाहनों पर लागू हैं।

जस्टिस अमित महाजन ने दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) की ओर से दायर एक याचिका पर यह आदेश दिया।

हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह छूट केवल कोर्ट के कामकाज वाले दिनों में ही मिलेगी।

वकीलों की संस्था की ओर से सीनियर एडवोकेट एन. हरिहरन पेश हुए।

एसोसिएशन ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) - जिसमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा और गाजियाबाद शामिल हैं - में रहने वाले वकीलों के लिए 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक अपने वाहनों से दिल्ली आने की अनुमति मांगी थी।

याचिका में अधिकारियों से एक 'नियमित छूट' (Regulated Exemption) देने का निर्देश देने की मांग की गई। इसके अलावा, यह भी मांग की गई कि दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग को निर्देश दिया जाए कि वे 27 अक्टूबर को एसोसिएशन द्वारा दिए गए आवेदन पर विचार करें और कोर्ट द्वारा तय समय-सीमा के भीतर एक तर्कपूर्ण आदेश जारी करें।

एसोसिएशन ने दिल्ली सरकार के पर्यावरण और वन विभाग द्वारा 23 जून 2026 को जारी एक नोटिफिकेशन के तहत लगाई गई पाबंदी को चुनौती दी थी।

इस नोटिफिकेशन के अनुसार, दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड और BS-VI स्टैंडर्ड से नीचे वाले वाहनों के 1 नवंबर से 31 जनवरी के बीच राष्ट्रीय राजधानी में चलने पर रोक है।

हालांकि, यह नोटिफिकेशन पर्यावरण विभाग को यह अधिकार देता है कि वह विशेष रूप से अन्य श्रेणियों के वाहनों को छूट दे सकता है।

DHCBA ने तर्क दिया कि इस प्रावधान के तहत अधिकारियों के पास उन वकीलों के लिए अलग से छूट देने का विकल्प है, जिन्हें कोर्ट, ट्रिब्यूनल, चैंबर और अन्य पेशेवर कामों के लिए दिल्ली आना पड़ता है।

उन्होंने दलील दी कि वकीलों की उपस्थिति अक्सर कोर्ट की लिस्टिंग और निर्देशों पर निर्भर करती है। ऐसे में अगर कोई वकील किसी मामले की सुनवाई के समय कोर्ट नहीं पहुंच पाता है तो इससे उन मुवक्किलों (Litigants) को नुकसान हो सकता है जिनका वे प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि वे पर्यावरण नियमों से पूरी तरह छूट या 'ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान' (GRAP) और कोर्ट के अनिवार्य आदेशों के तहत लगाई गई सख्त पाबंदियों से कोई विशेष छूट नहीं मांग रहे हैं। याचिका वकील अमित चौधरी के माध्यम से दायर की गई।

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