बाल मजदूरों की बकाया मजदूरी दिलाने के लिए लापता मालिकों का पता लगाए पुलिस: दिल्ली हाईकोर्ट

Update: 2026-05-26 12:27 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि बाल मजदूरी से मुक्त कराए गए बच्चों की बकाया मजदूरी की वसूली सुनिश्चित करने के लिए उन मालिकों का सक्रिय रूप से पता लगाया जाए, जो फिलहाल लापता या पहुंच से बाहर हैं।

जस्टिस सचिन दत्ता की एकलपीठ ने कहा कि बचाए गए बाल मजदूरों को उनका बकाया भुगतान दिलाना और पुनर्वास से जुड़े कानूनी प्रावधानों का पालन कराना प्रशासनिक अधिकारियों की वैधानिक जिम्मेदारी है।

अदालत ने यह आदेश तीन नाबालिग लड़कियों की माताओं द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। ये बच्चियां 9 मई 2023 को चलाए गए बाल मजदूरी विरोधी अभियान के दौरान मुक्त कराई गई थीं।

छापेमारी के बाद श्रम विभाग ने संबंधित नियोक्ताओं द्वारा देय बकाया मजदूरी की गणना की थी। इसके बाद किशोर न्याय अधिनियम और बाल एवं किशोर श्रम अधिनियम के तहत FIR भी दर्ज की गई।

हालांकि, याचिकाकर्ताओं द्वारा बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद नियोक्ताओं ने मजदूरी जमा नहीं कराई।

हाईकोर्ट ने 'कौम फकीर शाह बनाम श्रम एवं रोजगार मंत्रालय' और 'वाल्टर केरकेट्टा बनाम उपखंड दंडाधिकारी' मामलों में दिए गए दिशा-निर्देशों का हवाला दिया। इन फैसलों में बाल मजदूरों की बकाया मजदूरी वसूलने की विस्तृत प्रक्रिया तय की गई थी।

इन दिशा-निर्देशों के अनुसार बच्चों के बचाव के दो कार्य दिवस के भीतर वसूली नोटिस जारी करना आवश्यक है। यदि नियोक्ता भुगतान नहीं करते, तो वसूली प्रमाणपत्र जारी किया जा सकता है और संबंधित एसडीएम द्वारा इसे भू-राजस्व बकाया की तरह वसूला जा सकता है।

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि संबंधित नियोक्ता फिलहाल लापता हैं। इस पर हाईकोर्ट ने संबंधित एसडीएम को पुलिस अधिकारियों के साथ समन्वय कर नियोक्ताओं का पता लगाने का निर्देश दिया।

अदालत ने दिल्ली पुलिस को भी आदेश दिया कि वह सक्रिय रूप से जांच करे और आवश्यक सभी कदम उठाए, ताकि नियोक्ताओं का पता लगाकर बकाया मजदूरी की वसूली की प्रक्रिया पूरी की जा सके।

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