दिल्ली हाईकोर्ट ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की पूर्व प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी चित्रा रामकृष्ण को कथित अवैध फोन टैपिंग मामले में मिली जमानत को चुनौती देने वाली केंद्रीय जांच ब्यूरो की याचिका खारिज कर दी है।

जस्टिस मधु जैन ने बुधवार को मामले में फैसला सुनाते हुए CBI की याचिका खारिज की। हालांकि फैसले का विस्तृत आदेश अभी उपलब्ध नहीं हुआ।

CBI ने निचली अदालत के 22 दिसंबर, 2022 के उस आदेश को चुनौती दी, जिसके जरिए चित्रा रामकृष्ण को मामले में जमानत दी गई।

निचली अदालत ने जमानत देते समय उन्हें निर्देश दिया कि जब भी मामले की सुनवाई हो वह अदालत के सामने उपस्थित हों और जांच अधिकारी द्वारा बुलाए जाने पर जांच में सहयोग करें। अदालत ने उन्हें अभियोजन पक्ष के गवाहों से संपर्क करने या किसी भी तरह से प्रभावित करने से रोक दिया था। साथ ही मामले से जुड़े साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने का निर्देश भी दिया गया।

निचली अदालत ने यह भी शर्त लगाई थी कि वह अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जा सकतीं।

इस मामले के अलावा कथित घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में भी दिल्ली हाईकोर्ट ने 9 फरवरी 2023 को चित्रा रामकृष्ण को जमानत दी थी।

CBI की FIR के अनुसार NSE के कुछ सीनियर अधिकारियों ने कथित तौर पर आईसेक प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर NSE और उसके कर्मचारियों को धोखा देने की साजिश रची। आरोप है कि इसी साजिश के तहत NSE के कर्मचारियों के फोन पर होने वाली बातचीत को अवैध रूप से सुनने के लिए उक्त कंपनी की सेवाएं ली गईं।

चित्रा रामकृष्ण वर्ष 2009 में NSE की संयुक्त प्रबंध निदेशक बनी थीं। वह 31 मार्च 2013 तक इस पद पर रहीं। इसके बाद 1 अप्रैल 2013 को उन्हें NSE का प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी बनाया गया। दिसंबर 2016 में उनका NSE में कार्यकाल समाप्त हुआ।

CBI ने मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120-बी, 409 और 420 के अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, भारतीय तार अधिनियम, भारतीय वायरलेस टेलीग्राफी अधिनियम और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।

इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित अनुसूचित अपराधों के आधार पर धन शोधन का मामला दर्ज किया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप था कि आईसेक द्वारा सेवाएं उपलब्ध कराने से अर्जित 4.54 करोड़ रुपये की आय अपराध से अर्जित आय थी।

दिल्ली हाईकोर्ट के बुधवार के फैसले के बाद निचली अदालत द्वारा चित्रा रामकृष्ण को दी गई जमानत बरकरार रहेगी। विस्तृत आदेश सामने आने के बाद अदालत के जमानत बरकरार रखने के कारणों की स्थिति और स्पष्ट होगी।

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