अर्जुन पुरस्कार से बाहर किए जाने पर पहलवान नवीन मलिक की याचिका पर दिल्ली हाइकोर्ट ने जारी किया नोटिस

Update: 2026-01-21 10:40 GMT

दिल्ली हाइकोर्ट ने पिछले सप्ताह भारतीय फ्रीस्टाइल पहलवान और स्वर्ण पदक विजेता नवीन मलिक की याचिका पर नोटिस जारी किया। नवीन मलिक ने वर्ष 2025 के अर्जुन पुरस्कार से खुद को बाहर किए जाने को चुनौती दी।

यह मामला जस्टिस पुरुषैन्द्र कुमार कौरव के समक्ष आया, जिन्होंने प्रारंभिक सुनवाई के बाद केंद्र सरकार के युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय, खेल पुरस्कार चयन समिति 2025 और भारतीय खेल प्राधिकरण से जवाब मांगा। साथ ही इस मामले में पहलवान सोनम मलिक को भी नोटिस जारी किया गया।

अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी।

अर्जुन पुरस्कार देश का एक प्रतिष्ठित खेल सम्मान है, जो खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिया जाता है। नवीन मलिक एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवान हैं और उन्होंने कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पदक जीते हैं। इनमें कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में स्वर्ण पदक, सीनियर एशियन चैंपियनशिप 2022 में कांस्य पदक, अंडर-23 एशियन चैंपियनशिप 2022 में स्वर्ण पदक और अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप 2023 में कांस्य पदक शामिल हैं। नवीन मलिक भारतीय नौसेना में सेवारत भी हैं।

याचिका में नवीन मलिक ने खेल मंत्रालय द्वारा अर्जुन पुरस्कार के लिए तय की गई चयन योजना पर सवाल उठाया। उन्होंने विशेष रूप से उस व्यवस्था को चुनौती दी, जिसमें चयन 80 प्रतिशत अंक आधारित मूल्यांकन और 20 प्रतिशत चयन समिति के विवेकाधीन मूल्यांकन पर आधारित है।

नवीन मलिक का कहना है कि इस 20 प्रतिशत विवेकाधीन हिस्से के लिए कोई स्पष्ट मानदंड, पैमाना, स्कोरिंग प्रणाली या मूल्यांकन ढांचा तय नहीं किया गया। याचिका में कहा गया कि यह विवेकाधीन व्यवस्था पूरी तरह चयन समिति पर छोड़ दी गई है, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता प्रभावित होती है।

याचिका में दिल्ली हाइकोर्ट के पूर्व निर्णय शेख अब्दुल हमीद बनाम भारत संघ का भी हवाला दिया गया, जिसमें खेल पुरस्कारों में मनमानी, पक्षपात और व्यक्तिपरकता से बचने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय करने की बात कही गई।

नवीन मलिक ने यह भी आपत्ति जताई कि उनके मुकाबले वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन में अधिक अंक होने के बावजूद उन्हें अर्जुन पुरस्कार के लिए नहीं चुना गया, जबकि पहलवान सोनम मलिक को यह सम्मान दिया गया। उनका कहना है कि यह मामला दर्शाता है कि बिना किसी तय मानक के 20 प्रतिशत विवेकाधीन अंक चयन का पूरा परिणाम बदल सकते हैं।

हाइकोर्ट अब इस पूरे चयन ढांचे और याचिकाकर्ता की आपत्तियों पर संबंधित पक्षों से जवाब मिलने के बाद आगे विचार करेगा।

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