जिला अदालतों की वित्तीय अधिकारिता बढ़ाने के प्रस्ताव पर दिल्ली हाईकोर्ट में विवाद, बार एसोसिएशन पहुंची अदालत
दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) ने दिल्ली हाइकोर्ट में याचिका दायर कर उस जजों की समिति के गठन को चुनौती दी, जिसे जिला अदालतों की वित्तीय अधिकारिता 2 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये करने के प्रस्ताव की जांच के लिए बनाया गया था।
मामले का उल्लेख चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ के समक्ष किया गया। अदालत ने मामले को आज ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।
विवाद दिल्ली की जिला अदालतों की वित्तीय अधिकारिता में बड़े बदलाव के प्रस्ताव को लेकर है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो 20 करोड़ रुपये तक के दीवानी और वाणिज्यिक विवादों की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट के बजाय जिला अदालतों में होगी।
इस मुद्दे पर विभिन्न पक्षों से विचार-विमर्श और सुझाव लेने के लिए हाईकोर्ट ने जजों की एक समिति गठित की थी। समिति को पूरे मामले का अध्ययन कर अपनी सिफारिशें देने का दायित्व सौंपा गया था।
दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा है कि अधिकारिता में इतनी बड़ी बढ़ोतरी से हाईकोर्ट की मूल वाद शाखा के कामकाज पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। साथ ही जिला अदालतों पर जटिल वाणिज्यिक मामलों का अतिरिक्त बोझ बढ़ जाएगा।
बार एसोसिएशन का कहना है कि इतने बड़े मूल्य के वाणिज्यिक विवादों की सुनवाई के लिए आवश्यक ढांचा और संसाधनों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
मामले में जल्द ही विस्तृत सुनवाई होने की संभावना है।