धमकी या दबाव में दिए गए इस्तीफे को बिना जांच स्वीकार नहीं किया जा सकता : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

Update: 2026-07-25 11:08 GMT

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि किसी कर्मचारी ने अपने इस्तीफे में स्पष्ट रूप से लिखा है कि वह धमकी या दबाव में इस्तीफा दे रहा है तो नियोक्ता का यह कानूनी दायित्व है कि वह पहले यह सुनिश्चित करे कि इस्तीफा वास्तव में स्वेच्छा से दिया गया है या नहीं। बिना किसी जांच या सत्यापन के ऐसे इस्तीफे को स्वीकार करना कानून की दृष्टि में टिकाऊ नहीं माना जा सकता।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवीन्द्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ चौकसे इंजीनियरिंग कॉलेज की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कॉलेज ने एकल पीठ के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसके तहत सहायक प्राध्यापक का इस्तीफा स्वीकार करने का निर्णय रद्द कर दिया गया था।

मामले के अनुसार सहायक प्राध्यापक ने 21 सितंबर 2020 को इस्तीफा दिया था। उनका कहना था कि यह इस्तीफा स्वेच्छा से नहीं दिया गया बल्कि कॉलेज के दो सहकर्मियों की ओर से कथित तौर पर दी गई धमकी और दबाव के कारण देना पड़ा।

एकल पीठ ने इस्तीफे की स्वीकृति को निरस्त करते हुए कर्मचारी को सेवा में बहाल करने तथा बकाया वेतन और अन्य सेवा लाभ देने का निर्देश दिया था।

कॉलेज की ओर से दलील दी गई कि इस्तीफा पूरी तरह स्वेच्छा से दिया गया था और सक्षम प्राधिकारी ने नियमों के अनुसार उसे स्वीकार किया।

कॉलेज ने यह भी कहा कि दबाव या धमकी का कोई ठोस प्रमाण नहीं है और जिन दो सहकर्मियों पर आरोप लगाए गए थे उन्होंने शपथपत्र देकर इन आरोपों से इनकार किया।

साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि स्वेच्छा से दिए गए इस्तीफे को स्वीकार करने से पहले जांच कराना कानूनन अनिवार्य नहीं है।

हालांकि, हाईकोर्ट ने पाया कि इस्तीफे के पत्र में स्वयं यह दर्ज था कि कर्मचारी दो नामित सहकर्मियों के धमकी और दबाव के कारण इस्तीफा दे रहा है।

अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में प्रबंधन का दायित्व था कि वह इस्तीफा स्वीकार करने से पहले इसकी स्वैच्छिकता की जांच करता।

अदालत ने कहा,

"प्रबंधन के लिए यह आवश्यक था कि वह इस्तीफा स्वीकार करने से पहले यह संतुष्ट हो कि कर्मचारी ने उसे स्वेच्छा से दिया। यह स्वीकार किया गया है कि इस संबंध में कोई जांच या सत्यापन नहीं किया गया। बाद में संबंधित सहकर्मियों द्वारा शपथपत्र देकर आरोपों से इनकार करना उस समय की गई इस चूक को दूर नहीं कर सकता।"

खंडपीठ ने माना कि एकल पीठ का यह निष्कर्ष सही था कि इस्तीफा स्वैच्छिक नहीं था।

अदालत ने कहा कि जब इस्तीफे की स्वीकृति ही अवैध घोषित कर दी गई है तो कर्मचारी की सेवा में बहाली, बकाया वेतन और अन्य सेवा लाभ देने का आदेश स्वाभाविक परिणाम है।

इन्हीं टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने कॉलेज की अपील खारिज की।

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