5 साल की बच्ची से दुष्कर्म-हत्या मामले में दोषी की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

Update: 2026-03-11 10:56 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में 5 वर्ष की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए अतुल निहाले की फांसी की सजा पर फिलहाल रोक लगाई। अदालत ने मामले की पूरी सुनवाई के लिए रिकॉर्ड तलब करते हुए कई अतिरिक्त रिपोर्टें भी मांगी।

जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की पीठ ने यह आदेश उस अपील पर दिया, जिसमें दोषी ने मध्य प्रदेश हाइकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। हाइकोर्ट ने स्पेशल कोर्ट द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा बरकरार रखते हुए कहा था कि इस मामले में “हर सबूत से क्रूरता टपकती है।”

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मामले के सभी रिकॉर्ड मंगाने का निर्देश दिया। साथ ही अदालत ने प्रोबेशन अधिकारी की रिपोर्ट, जेल में दोषी के आचरण और किए गए कार्यों की रिपोर्ट तथा उसकी मनोवैज्ञानिक जांच की रिपोर्ट भी पेश करने को कहा है।

अभियोजन के अनुसार 24 सितंबर 2024 को बच्ची की मां ने शाहजहांनाबाद थाने में शिकायत दर्ज कराई कि उनकी बेटी लापता हो गई। जांच के दौरान पुलिस ने तलाशी अभियान चलाया। इसी दौरान आरोपी के फ्लैट से तेज दुर्गंध आने पर पुलिस अंदर गई, जहां बाथरूम में रखी प्लास्टिक की पानी की टंकी में बच्ची का शव मिला।

मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी ने हाइकोर्ट में दावा किया कि अपराध किसी अज्ञात व्यक्ति ने किया हो सकता है और उसे बिना पर्याप्त साक्ष्य के फंसा दिया गया। उसने यह भी कहा कि जिस फ्लैट से शव बरामद हुआ वह उसका नहीं था और बरामदगी की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।

हालांकि राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि आरोपी को अपराध से जोड़ने वाले पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं और अभियोजन ने अपना मामला संदेह से परे साबित किया।

सभी पक्षों को सुनने के बाद हाइकोर्ट ने कहा था कि यह अत्यंत क्रूर तरीके से किए गए यौन उत्पीड़न का मामला है, जिसमें बच्ची की मौत गंभीर चोटों के कारण हुई। अदालत ने यह भी कहा कि बच्ची के लापता होने की रिपोर्ट, आरोपी के घर से शव की बरामदगी, खून से सने सामान की जब्ती और अन्य साक्ष्य घटनाक्रम की पूरी श्रृंखला स्थापित करते हैं।

हाइकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि मृत बच्ची के माता-पिता को केवल इसलिए अविश्वसनीय नहीं माना जा सकता कि वे पीड़िता के परिजन हैं। अदालत ने कहा कि अपनी पांच वर्षीय बेटी की निर्मम हत्या के बाद उनके पास किसी निर्दोष व्यक्ति को फंसाने का कोई कारण नहीं हो सकता।

अदालत ने अपने फैसले में घटना को अत्यंत बर्बर बताते हुए कहा कि आरोपी ने बच्ची का मुंह बंद किया और चाकू का इस्तेमाल कर उसके साथ अमानवीय यौन अत्याचार किया, जिससे उसकी मृत्यु हो गई।

इसी आधार पर हाइकोर्ट ने इस मामले को दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी का बताते हुए फांसी की सजा को सही ठहराया था। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने सजा पर रोक लगाते हुए मामले की विस्तृत सुनवाई का रास्ता खुला रखा।

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