"वेट लूज" प्रोग्राम के बारे में भ्रामक विज्ञापन अनुचित व्यापार व्यवहार का कृत्य है: चंडीगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग
चंडीगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने माना कि वजन घटाने के कार्यक्रमों (Weight Loss Programme) के बारे में भ्रामक विज्ञापन अनुचित व्यापार व्यवहार का कार्य है।
प्रोग्राम से शिकायकर्ता को हुई मानसिक पीड़ा के लिए जुर्माना के साथ पूरी प्रोग्राम फीस वापस करने के जिला आयोग के आदेश के खिलाफ वीएलसीसी की अपील को खारिज करते हुए राज्य आयोग ने कहा,
"अपीलकर्ताओं का एक तरफ भ्रामक विज्ञापनों से झूठे आश्वासन देना और दूसरी ओर उपभोक्ताओं से घोषणा प्राप्त करना और कार्यक्रम के परिणाम के बारे में कोई गारंटी/आश्वासन नहीं देना अनुचित व्यापार का स्पष्ट उदाहरण है। उनके द्वारा अपनाई गई प्रथाओं से उपभोक्ताओं (इस मामले में प्रतिवादी) को अपीलकर्ताओं के हाथों पीड़ित नहीं किया जा सकता।"
प्रतिवादी-शिकायतकर्ता ने वीएलसीसी के वजन घटाने और पेट ट्रिम कार्यक्रम को खरीदा। इसने मनी बैक गारंटी के साथ एक महीने के भीतर पांच किलो वजन घटाने और 4 इंच के पेट की परिधि कम करने का वादा किया। हालांकि, जब कोई परिणाम नहीं निकला तो अपीलकर्ता ने प्रतिवादी को अन्य कार्यक्रम की सिफारिश की, जिसमें उपचार के लिए आयातित मशीन शामिल थी। इससे भी जब कोई नतीजा नहीं निकला तो उसने उपभोक्ता आयोग में शिकायत की।
वीएलसीसी ने प्रस्तुत किया कि प्रतिवादी ने अंडरटेकिंग दिया कि वह समझता है कि कार्यक्रम के परिणाम के संबंध में उसे कोई गारंटी/आश्वासन नहीं दिया जा सकता और वीएलसीसी कर्मचारियों के नियंत्रण से परे कारकों के कारण असंतोषजनक परिणामों की परिस्थितियों में वह दावा / क्षति या वीएलसीसी या उसके कर्मचारियों को उत्तरदायी ठहराने के लिए हकदार नहीं होगा। इसके अलावा, प्रतिवादी को कुछ आहार संबंधी निर्देशों का कड़ाई से पालन करना और वांछित परिणाम के लिए कोर्स को पूरा करना था। इस बारे में वीएलसीसी ने दावा किया कि इसे प्रतिवादी ने नहीं किया।
राज्य आयोग ने पाया कि वीएलसीसी द्वारा दिया गया अस्वीकरण कानून की नजर में टिक नहीं सकता, क्योंकि उसका विज्ञापन मनी बैक गारंटी का है।
आयोग ने अवलोकन किया,
"अब जब पहली योजना से कोई वांछनीय परिणाम सामने नहीं आ रहा है तो अपीलकर्ताओं ने प्रतिवादी को आयातित महंगी मशीन दिखाकर उसे लुभाया, जिससे उपचार किया जाएगा। इसके लिए अपीलकर्ताओं ने प्रतिवादी को और भुगतान करने के लिए कहा।"
मामले दिव्या सूद बनाम गुरदीप कौर भुही पर भरोसा किया गया, जहां राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने पाया कि वजन घटाने के बारे में भ्रामक बयानों वाले आकर्षक विज्ञापन बढ़ रहे हैं और उन्हें नियंत्रित करने की आवश्यकता है।
तद्नुसार अपील खारिज कर दी गई।
केस टाइटल - मेसर्स वीएलसीसी हेल्थ केयर लिमिटेड बनाम विजय अग्रवाल
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