दक्षिणपंथी विचारक विनायक सावरकर के पोते (भाई के पोते) सत्यकी सावरकर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि मामले में अपनी चल रही 'क्रॉस-एग्जामिनेशन' (जिरह) पर आपत्ति जताई और आशंका जताई कि उनका लगातार पीछा किया जा रहा है या उन पर नज़र रखी जा रही है।

सत्यकी ने गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दायर किया। आरोप है कि गांधी ने यूनाइटेड किंगडम में एक भाषण के दौरान सावरकर की बदनामी की। उस भाषण में उन्होंने कथित तौर पर कहा कि सावरकर ने अपनी एक किताब में लिखा है कि उन्होंने और उनके दोस्तों ने एक मुस्लिम व्यक्ति पर हमला किया था, जिससे उन्हें संतुष्टि मिली थी।

गौरतलब है कि इस साल जनवरी से गांधी के वकील मिलिंद पवार कई मौकों पर सत्यकी से क्रॉस-एग्जामिनेशन कर रहे हैं। क्रॉस-एग्जामिनेशन के दौरान, सत्यकी से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) जैसे दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने के बारे में कई सवाल पूछे जा रहे हैं। सत्यकी का कहना है कि ऐसे 'निजी' सवाल 'बेमतलब' हैं।

पुणे की एक विशेष MP/MLA अदालत में दायर एक अर्जी में सत्यकी ने तर्क दिया कि गांधी के वकील द्वारा पूछे जा रहे ये सवाल असल में बिना किसी ठोस आधार के की जा रही पूछताछ (roving inquiry) है, जो उनकी निजता के अधिकार का उल्लंघन करती है।

सत्यकी ने कहा,

"बचाव पक्ष लगातार शिकायतकर्ता की दिनचर्या, निजी कामों और विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और सार्वजनिक समारोहों में शामिल होने के बारे में सवाल पूछ रहा है। इन सवालों का मौजूदा शिकायत के विषय या मुख्य गवाही (एग्जामिनेशन-इन-चीफ) में दर्ज बयानों से कोई लेना-देना नहीं है। इस तरह की पूछताछ का मकसद सिर्फ़ प्रक्रिया को लंबा खींचना और बेवजह परेशान करना है। शिकायतकर्ता से कई बार विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होने के बारे में पूछा जाता है, जो बेमतलब और आपत्तिजनक है। इस पर अदालत का ध्यान जाना चाहिए। शिकायतकर्ता को आशंका है कि उस पर लगातार नज़र रखी जा रही है, उसका पीछा किया जा रहा है और वह निगरानी में है। इस आशंका के कारण शिकायतकर्ता को बहुत परेशानी और असुरक्षा की भावना महसूस हो रही है। निगरानी की यह आशंका उसके बुनियादी मौलिक अधिकार का उल्लंघन कर रही है।"

वकील संग्राम कोल्हटकर के ज़रिए दायर अर्ज़ी में कहा गया कि सत्याकी एक पब्लिक फ़िगर हैं और इसलिए उन्हें कई कार्यक्रमों और समारोहों में शामिल होना पड़ता है; ऐसे में इन कार्यक्रमों के बारे में पूछे गए सवाल इस मामले की कार्यवाही का विषय नहीं हैं।

सत्याकी ने कहा,

"इसमें कहा गया कि शिकायतकर्ता की निजी रोज़मर्रा की ज़िंदगी या सामाजिक ज़िम्मेदारियों का इस मुक़दमे से कोई लेना-देना नहीं है। आरोपी द्वारा पूछे जा रहे बेमतलब के सवाल एक गंभीर स्थिति पैदा करते हैं, क्योंकि आरोपी एक ऊंचे, ज़िम्मेदार, संवैधानिक और प्रभावशाली पद पर हैं। यह ध्यान देना ज़रूरी है कि शिकायतकर्ता ने कभी भी आरोपी की निजी ज़िंदगी या उनके समय-समय पर विदेश दौरों और उनके मक़सद में दखल नहीं दिया। शिकायतकर्ता की गतिविधियों और सार्वजनिक उपस्थिति के बारे में पूछताछ करने से निगरानी का एक दमनकारी माहौल बनता है, जो सीधे तौर पर उनकी निजी आज़ादी और निजता के अधिकार में बाधा डालता है। आरोपी मुझे परेशान करने के लिए ही ऐसे बेमतलब के सवाल पूछ रहे हैं और बेमतलब और गैर-ज़रूरी सवाल पूछकर अदालत का कीमती समय बर्बाद कर रहे हैं। अगर उन्हें ऐसे बेमतलब के सवाल पूछने से नहीं रोका गया तो जिरह (cross-examination) सालों-साल चलती रहेगी और कभी खत्म नहीं होगी।"

सत्याकी ने कहा है कि जिरह को बार-बार स्वतंत्र सामाजिक संस्थाओं, सांस्कृतिक मंचों और राजनीतिक संगठनों की ओर मोड़ा जा रहा है, जिनका इस मामले की कार्यवाही से कोई लेना-देना नहीं है; ऐसा सिर्फ़ मुक़दमे को राजनीतिक रंग देने और अदालत का कीमती समय बर्बाद करने के लिए किया जा रहा है।

उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि जिरह पिछले 10 महीनों से चल रही है, लेकिन गांधी ने अभी तक कोई समय-सीमा या शेड्यूल नहीं बताया है कि वे इसे कब खत्म करेंगे।

Case Title : Satyaki Savarkar vs Rahul Gandhi

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