पिछले हफ्ते (14 अक्टूबर) पुणे की स्पेशल MP/MLA कोर्ट में क्रॉस एग्जामिनेशन के दौरान, हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर के प्रपौत्र (पोते के बेटे) सत्याकी सावरकर ने कहा कि वह महात्मा गांधी की हत्या का समर्थन नहीं करते हैं। उन्होंने दावा किया कि विनायक सावरकर ने खुद राष्ट्रपिता की हत्या की निंदा की थी।

सत्याकी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई। उनका आरोप है कि राहुल गांधी ने यूनाइटेड किंगडम में दिए गए एक भाषण में विनायक सावरकर की छवि खराब की। कथित तौर पर गांधी ने दावा किया था कि सावरकर ने अपनी एक किताब में लिखा है कि उन्होंने और उनके दोस्तों ने एक मुस्लिम व्यक्ति पर हमला किया था, और इस घटना से उन्हें संतुष्टि मिली थी।

पिछले हफ्ते गांधी की ओर से पेश वकील मिलिंद पवार ने सत्याकी से क्रॉस एग्जामिनेशन जारी रखी। उन्होंने बताया कि हत्या के मामले में अपनी सजा काटने के बाद, सत्याकी के नाना-नानी (या दादा-दादी की तरफ के रिश्तेदार) - गोपाल गोडसे और सिंधु गोडसे - ने कुछ इंटरव्यू दिए। इन इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उन्हें गांधीजी की हत्या की योजना के बारे में पहले से पता था। साथ ही उन्होंने कुछ ऐसे बयान भी दिए, जिनसे हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच दुश्मनी पैदा हो सकती थी।

सत्याकी ने इस बात से इनकार किया कि उनके नाना-नानी ने दोनों समुदायों के बीच नफरत फैलाने के इरादे से कोई इंटरव्यू दिया।

इसके बाद वकील पवार ने एक सीधा सवाल पूछा,

"गोपाल गोडसे, नाथूराम गोडसे और विनायक सावरकर के वंशज होने के नाते, क्या आप महात्मा गांधी की हत्या का समर्थन करते हैं?"

सत्याकी ने जवाब दिया,

"नहीं। मैं महात्मा गांधी की हत्या का समर्थन नहीं करता। स्वातंत्र्यवीर सावरकर ने भी महात्मा गांधी की हत्या की निंदा की थी।"

सत्याकी ने आगे माना कि सावरकर, महात्मा गांधी के कुछ राजनीतिक विचारों से सहमत नहीं थे, लेकिन वे उनकी हत्या नहीं करना चाहते थे।

शिकायतकर्ता सत्याकी ने कहा,

"यह सच है कि स्वातंत्र्यवीर सावरकर, महात्मा गांधी के कुछ राजनीतिक विचारों और सिद्धांतों से सहमत नहीं थे। मुझे नहीं पता कि 12 नवंबर 1964 को पुणे के उद्यान भवन में गोपाल गोडसे, मदनलाल पाहवा और विष्णु करकरे की सजा पूरी होने के बाद उनकी रिहाई पर उनके सम्मान में सत्यनारायण पूजा और अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया था या नहीं। मुझे नहीं पता कि लोकमान्य तिलक के पोते, जी.वी. केतकर ने उस कार्यक्रम की अध्यक्षता की थी या नहीं। मुझे यह भी नहीं पता कि जी.वी. केतकर ने अपने अध्यक्षीय भाषण में यह कहा था या नहीं कि उन्हें महात्मा गांधी की हत्या की साजिश के बारे में हत्या से छह महीने पहले ही पता चल गया। इसी वजह से कपूर आयोग का गठन किया गया।"

सत्याकी ने आगे कहा कि जस्टिस जीवनलाल कपूर आयोग ने गांधी की हत्या से जुड़ी साजिश की स्वतंत्र रूप से जांच की थी और आयोग द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में सावरकर का नाम शामिल है।

अदालत ने दर्ज किया,

"गवाह ने अपनी ओर से कहा कि कोई भी आयोग अदालत से ऊपर नहीं है और कपूर आयोग भी इसका अपवाद नहीं है। कपूर आयोग की रिपोर्ट को सरकार ने स्वीकार नहीं किया था। सरकार ने महात्मा गांधी हत्याकांड में अदालत द्वारा दिए गए फैसलों को चुनौती नहीं दी थी।"

मामले में जिरह 28 अक्टूबर को जारी रहेगी।

Case Title : Satyaki Savarkar vs Rahul Gandhi

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