मुंबई के डिंडोशी स्थित विशेष POCSO कोर्ट ने पोवाई पुलिस स्टेशन में दर्ज C.R. No. 727/2025 से संबंधित जमानत आवेदन को मंजूर करते हुए महिला आरोपी मदीना अनवर हुसैन सैयद को जमानत दी।
मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74 एवं 79 तथा लैंगिग अपराधों से बाल संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) की धारा 8 एवं 12 के तहत आरोप लगाए गए थे। मामला गंभीर आरोपों और अभियोजन पक्ष की कड़ी आपत्तियों के कारण काफी चुनौतीपूर्ण था।
इससे पहले 19 सितंबर 2025 को कोर्ट ने आरोपी का अग्रिम जमानत आवेदन (Anticipatory Bail Application) खारिज कर दिया था। इसके बाद स्थायी जमानत के लिए बचाव पक्ष की ओर से आवेदन दायर किया गया।
आरोपी की ओर से एडवोकेट शुभम उपाध्याय ने मामले की पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष जांच की स्थिति, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(3) के तहत जारी नोटिस, चार्जशीट दाखिल होने तथा आरोपी की गिरफ्तारी न होने जैसे महत्वपूर्ण तथ्य पेश किए।
न्यायालय ने अपने आदेश में माना कि जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि जांच एजेंसी द्वारा BNSS की धारा 35(3) के तहत जारी किया गया था, लेकिन इसके बाद भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया और जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट दाखिल कर दी गई।
इसी आधार पर जज रेणुका एम. सातव ने अभियोजन की उस आपत्ति में मैरिट नहीं पाया कि आरोपी ने जांच में सहयोग नहीं किया।
न्यायालय ने दोनों पक्षकारों के बीच पहले की शिकायतों को भी ध्यान में रखा और प्रथम दृष्टया पुरानी दुश्मनी का उल्लेख किया। पीड़ित की ओर से धमकी की आशंका व्यक्त किए जाने के बावजूद, कोर्ट ने माना कि उचित जमानत शर्तें लगाकर ऐसी आशंकाओं को नियंत्रित किया जा सकता है।
कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि आरोपी एक महिला एवं पेशे से स्टंटवुमन (Stuntwoman) है और अपने परिवार का भरण-पोषण करती है। इसके अलावा, उसके फिंगरप्रिंट एवं बायोमैट्रिक्स पहले ही लिए जा चुके हैं।
सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए 28 अगस्त 2026 को माननीय न्यायालय ने आरोपी को स्थानीय जमानत आवेदन को मंजूर दी।
कोर्ट ने जमानत के लिए आरोपी को ₹30,000 के पर्सनल बॉन्ड और ₹30,000 के एक स्क्रूटी बॉन्ड पर जमानत प्रदान की गई।
लेखक- एडवोकेट शुभम उपाध्याय। लाइव लॉ हिंदी के लिए।