हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ़ लॉ के स्टूडेंट्स के ग्रुप ने बुधवार शाम यूनिवर्सिटी कैंपस में जेल में बंद एक्टिविस्ट उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग आयोजित की।

आयोजकों में से एक ने बताया कि फिल्ममेकर ललित वचानी की डायरेक्ट की गई डॉक्यूमेंट्री "प्रिजनर नंबर 626710 इज़ प्रेजेंट" (Prisoner No. 626710 is Present) की स्क्रीनिंग कैदी के साथ एकजुटता दिखाने के लिए की गई।

स्टूडेंट्स ने स्क्रीनिंग के लिए प्रोजेक्टर और स्टैंड का इंतज़ाम खुद किया। उन्हें उम्मीद थी कि यह इवेंट "दूसरी यूनिवर्सिटीज़ में भी ऐसी प्रेरणा जगाएगा कि वे फासीवादी ताकतों के सामने झुकें नहीं।"

उमर खाल़िद जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र हैं। वह 2019 के CAA-विरोधी प्रदर्शनों में सबसे आगे थे, इसीलिए दिल्ली दंगों के पीछे कथित बड़ी साज़िश से जुड़े UAPA मामले में सितंबर 2020 से हिरासत में हैं।

NALSAR में यह स्क्रीनिंग ऐसे समय में हुई, जब कुछ दिन पहले ही बेंगलुरु की नेशनल लॉ स्कूल ऑफ़ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) के स्टूडेंट ग्रुप ने 'पॉलिटिकल प्रिज़नर्स डे' (राजनीतिक कैदी दिवस) पर इसी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग रद्द कर दी थी। ऐसा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के विरोध के बाद किया गया था।

NLSIU स्टूडेंट ग्रुप ने कहा कि डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की योजना बनाने के कारण उन्हें "आपराधिक कार्रवाई, डराने-धमकाने, डॉक्सिंग (निजी जानकारी सार्वजनिक करने) और उत्पीड़न के अन्य तरीकों की गंभीर धमकियों" का सामना करना पड़ा।

इससे पहले, सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी हैदराबाद से डॉक्यूमेंट्री की प्रस्तावित स्क्रीनिंग के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था।

बोर्ड ने कहा था,

"ऐसी डॉक्यूमेंट्री फिल्म की सार्वजनिक स्क्रीनिंग, जिसे CBFC ने अभी तक सर्टिफाई नहीं किया, सिनेमैटोग्राफ एक्ट का उल्लंघन है, जब तक कि एक्ट के तहत कोई खास छूट न ली गई हो।"

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