मध्य प्रदेश में सुनने में अक्षम पेशेवरों के लिए देश का पहला 40 घंटे का मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू
न्याय तक समावेशी पहुंच को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने सुनने में अक्षम पेशेवरों और सांकेतिक भाषा दुभाषियों के लिए देश का पहला 40 घंटे का प्रत्यक्ष मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया। यह पांच दिवसीय गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम इंदौर में आयोजित किया जा रहा है।
यह कार्यक्रम इंदौर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से तथा सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है।
यह पहल मध्य प्रदेश हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस और मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के संरक्षक प्रमुख जस्टिस संजीव सचदेवा के नेतृत्व में तथा जस्टिस विवेक रूसिया के मार्गदर्शन में शुरू की गई है। कार्यक्रम का उद्घाटन मध्य प्रदेश हाइकोर्ट के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला ने किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जस्टिस विजय कुमार शुक्ला ने कहा कि मध्यस्थता न्याय का सबसे मानवीय और सहभागितापूर्ण तरीका है, जिसमें टकराव की जगह संवाद होता है और आपसी समझ से स्थायी समाधान निकलते हैं।
उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था को लगातार विकसित होना चाहिए ताकि विवाद समाधान की सुविधाएं समाज के हर वर्ग तक पहुंच सकें।
उन्होंने कहा कि सुनने में अक्षम पेशेवरों और सांकेतिक भाषा दुभाषियों को मध्यस्थता का प्रशिक्षण देना वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली को अधिक समावेशी और सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव सुमन श्रीवास्तव ने कहा कि मध्यस्थता मूल रूप से समझ, सहानुभूति और संवाद पर आधारित होती है।
उन्होंने कहा कि कई बार शब्दों की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि धैर्य, विश्वास और संवेदनशीलता से भी प्रभावी संवाद स्थापित किया जा सकता है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को मध्यस्थता के सिद्धांत, संवाद तकनीक, वार्ता रणनीति, विवाद विश्लेषण, मध्यस्थ के आचार सिद्धांत और व्यावहारिक अभ्यास से संबंधित प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
साथ ही प्रभावी मध्यस्थता के लिए आवश्यक कौशल जैसे सक्रिय सुनना, गैर-शाब्दिक संवाद, संरचित वार्ता और सहमति आधारित समाधान की प्रक्रिया भी सिखाई जा रही है।
इस पहल को आनंद सर्विस सोसाइटी का सहयोग मिला है। ज्ञानेंद्र पुरोहित ने सुनने में अक्षम समुदाय के साथ समन्वय स्थापित करने और प्रतिभागियों की भागीदारी सुनिश्चित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में मध्य प्रदेश हाइकोर्ट इंदौर पीठ के प्रधान रजिस्ट्रार अनूप कुमार त्रिपाठी, इंदौर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव शिवराज सिंह गवली, मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के उप सचिव अनिरुद्ध जैन और जिला विधिक सहायता अधिकारी दीपक शर्मा सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रतिभागियों को उनके जिलों के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के साथ पैनल में शामिल किया जाएगा, जहां वे विशेष रूप से सुनने में अक्षम लोगों से जुड़े विवादों में मध्यस्थता और समाधान की प्रक्रिया में सहयोग करेंगे।
यह पहल विवाद समाधान तंत्र को अधिक समावेशी और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो यह संदेश देती है कि सार्थक संवाद केवल शब्दों तक सीमित नहीं होता बल्कि समझ, संवेदना और वैकल्पिक संचार माध्यमों के जरिए भी संभव है।