लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन (LAFC) द्वारा गठित पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस मदन बी. लोकुर की अध्यक्षता वाला स्वतंत्र आयोग 15 अक्टूबर को दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ी शिकायतों पर पहली सार्वजनिक सुनवाई करेगा।

यह जनसुनवाई नई दिल्ली स्थित जवाहर भवन में सुबह 9 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक आयोजित होगी। आयोग अब SIR से प्रभावित मतदाताओं की गवाही सुनेगा और उनके अनुभवों तथा शिकायतों को औपचारिक रूप से दर्ज करेगा।

SIR की संवैधानिक वैधता और प्रक्रिया की होगी जांच

आयोग का गठन भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की संवैधानिक वैधता, कार्यप्रणाली और प्रभावों की जांच करने के लिए किया गया है।

LAFC की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जनसुनवाई का उद्देश्य SIR प्रक्रिया से प्रभावित मतदाताओं की चिंताओं को सुनना और उन्हें रिकॉर्ड पर लाना है। यह देशभर में प्रस्तावित जनसुनवाइयों की पहली कड़ी होगी।

आयोग ने कहा है कि इस पहल का उद्देश्य पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा और लोकतंत्र के इस बुनियादी सिद्धांत को मजबूत करना है कि प्रत्येक पात्र मतदाता की आवाज महत्वपूर्ण है।

चुनाव आयोग को भी शामिल होने का न्योता

आयोग ने निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को सुनिश्चित करने के लिए भारतीय निर्वाचन आयोग को भी प्रक्रिया में शामिल होने का आमंत्रण दिया है।

इसके लिए आयोग के सचिवालय को निर्देश दिया गया है कि वह ECI को औपचारिक सूचना भेजे और सुनवाई में शामिल होने तथा मतदाताओं की गवाही सुनने के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी नामित करने का अनुरोध करे।

आयोग में कौन-कौन शामिल हैं?

जस्टिस मदन बी. लोकुर की अध्यक्षता वाले आयोग के अन्य सदस्यों में पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस ए.के. पटनायक, जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बदर दुर्रेज अहमद, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रेखा शर्मा और पटना हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस अंजना प्रकाश शामिल हैं।

आयोग को कानूनी सहायता देने वालों में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण, चंदर उदय सिंह, प्रशांतो चंद्र सेन और राजू रामचंद्रन के साथ अधिवक्ता रेबेका मैमन जॉन, वारिशा फरासत और वृंदा ग्रोवर सहित अन्य वकील शामिल हैं।

LAFC में स्थित समन्वय समिति और सचिवालय आयोग के कामकाज में सहयोग करेंगे।

दिसंबर 2026 तक रिपोर्ट जारी करने का लक्ष्य

आयोग का लक्ष्य अपनी जांच पूरी कर दिसंबर 2026 तक अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक करना है। इस प्रक्रिया के माध्यम से SIR से प्रभावित मतदाताओं की शिकायतों और अनुभवों को दर्ज कर मतदाता सूची पुनरीक्षण तथा पात्र नागरिकों के मतदान अधिकारों से जुड़े मुद्दों का परीक्षण किया जाएगा।

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