पीएम के खिलाफ कथित अपशब्द कहने पर हिमाचल कांग्रेस नेता के खिलाफ दर्ज FIR रद्द
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चुनावी रैली में प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में कांग्रेस नेता के खिलाफ दर्ज FIR रद्द की। अदालत ने स्पष्ट कहा कि केवल अपशब्दों के इस्तेमाल से यह साबित नहीं होता कि आरोपी ने समाज के विभिन्न वर्गों के बीच वैमनस्य या नफरत फैलाने की कोशिश की।
जस्टिस संदीप शर्मा ने अपने फैसले में कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई आरोप नहीं है, जिससे यह साबित हो कि याचिकाकर्ता ने प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए धर्म, जाति, समुदाय या भाषा के आधार पर लोगों के बीच नफरत फैलाने का प्रयास किया।
अदालत ने टिप्पणी की,
“रिकॉर्ड में ऐसा कोई आरोप नहीं है कि याचिकाकर्ता ने अपमानजनक भाषा का प्रयोग करते हुए विभिन्न वर्गों के बीच वैमनस्य बढ़ाने की कोशिश की हो।”
मामला उस शिकायत से जुड़ा था, जिसमें एक राजनीतिक दल के पदाधिकारी ने आरोप लगाया था कि चुनावी सभा के दौरान कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की। इस शिकायत को मुख्य निर्वाचन अधिकारी के माध्यम से पुलिस को भेजा गया जिसके बाद जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125 और भारतीय दंड संहिता की धारा 504 के तहत FIR दर्ज की गई।
याचिकाकर्ता ने हाइकोर्ट का रुख करते हुए कहा कि FIR में लगाए गए आरोप अस्पष्ट हैं और किसी संज्ञेय अपराध का खुलासा नहीं करते।
हाईकोर्ट ने मामले की जांच में कई खामियां भी पाईं। अदालत ने कहा कि जिस व्यक्ति का कथित रूप से अपमान हुआ उसने स्वयं कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई। इसके अलावा शिकायत की भाषा भी अस्पष्ट और सामान्य थी, जिसमें ठोस तथ्यों का अभाव था।
अदालत ने यह भी पाया कि जांच एजेंसी ने कोई ठोस साक्ष्य एकत्र नहीं किया और आरोपपत्र में केवल FIR की बातों को ही दोहराया गया, बिना किसी अतिरिक्त प्रमाण के।
हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामलों में कार्यवाही जारी रखना अनावश्यक उत्पीड़न के समान होगा। इसी आधार पर अदालत ने FIR रद्द की।