दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को COVID -19 महामारी के बीच ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई मौतों की जांच के लिए दिल्ली सरकार द्वारा गठित उच्चाधिकार समिति (एचपीसी) को काम करने की मंजूरी दे दी।

न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने समिति को अपनी मंजूरी देते हुए कहा कि उसे सौंपी गई भूमिकाओं के निर्वहन में एचपीसी के कामकाज में कोई कठिनाई नहीं है।

कोर्ट ने हालांकि दिल्ली सरकार की इस दलील पर गौर किया कि हाई पावर्ड कमेटी पूरी कवायद में किसी अस्पताल को गलत नहीं ठहराएगी और पूरे मुआवजे का भुगतान अकेले सरकार करेगी।

बेंच ने कहा,

"हमें नहीं लगता कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा तय किए गए पीड़ित को अनुग्रह राशि देने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार करना हमारे लिए आवश्यक है।"

सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा कि एचपीसी केवल तथ्य की खोज करने के लिए समिति है और वह मानदंड के आधार पर 5 लाख रुपये तक के मुआवजे की राशि की गणना करेगी।

दूसरी ओर दिल्ली एलजी की ओर से पेश हुए एएसजी संजय जैन ने कोर्ट से अनुरोध किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार एनडीएमए द्वारा एक समान अनुग्रह राशि के मुद्दे पर दिशा-निर्देशों का इंतजार करें।

अदालत एक महिला द्वारा दायर याचिका पर विचार कर रही थी, जिसके 34 वर्षीय पति की COVID -19 की दूसरी लहर के दौरान मौत हो गई थी। यह उसका मामला था कि उसका पति किसी घातक बीमारी से पीड़ित नहीं था और डिस्चार्ज समरी में उसकी मृत्यु का कारण नहीं बताया गया था।

इससे पहले, दिल्ली सरकार ने अदालत को सूचित किया था कि उपराज्यपाल के पास उच्चाधिकार प्राप्त समिति के गठन पर आपत्ति करने का कोई उचित और वैध औचित्य नहीं है।

उक्त उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन दिल्ली सरकार द्वारा दूसरी COVID -19 लहर के बाद किया गया था, जिसमें चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल थे, जिन्हें संबंधित अस्पताल द्वारा पेश किए गए मामले के रिकॉर्ड का अध्ययन करने के बाद मौत के मामलों के संभावित कारण का पता लगाने के लिए केस-टू-केस आधार पर तथ्य-खोजने करने का काम सौंपा गया था।

दिल्ली सरकार ने यह भी सूचित किया कि उक्त नीतिगत निर्णय इस निर्विवाद तथ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया था कि संवैधानिक न्यायालय, उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय से यह अपेक्षा करना न तो संभव है और न ही संभव है कि वह एक ऐसी कवायद शुरू करे जिसमें तथ्यों के प्रश्नों के निर्णय की आवश्यकता हो।

केस का शीर्षक: रीति सिंह वर्मा बनाम दिल्ली के एनसीटी राज्य और अन्य।