रिलायंस को बड़ी राहत: 21 साल पुराना 1.46 करोड़ का पानी बिल रद्द

Update: 2026-04-23 06:56 GMT

गुजरात हाइकोर्ट ने रिलायंस इंडस्ट्रीज को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार द्वारा जारी 21 साल पुराने 1.46 करोड़ रुपये (146.79 लाख) के पानी बिल रद्द किया। अदालत ने कहा कि यह मांग ऐसे सरकारी प्रस्ताव पर आधारित थी, जिसे उस समय लागू ही नहीं किया गया और लेन-देन पहले ही पूरा हो चुका था।

जस्टिस हेमंत एम. प्रच्छक ने अपने फैसले में कहा कि जून 2005 में भुगतान के साथ ही पूरा सौदा समाप्त हो चुका था। ऐसे में अब पुराने आधार पर बकाया राशि की मांग करना उचित नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर कंपनी को पहले से पता होता कि 2002 के सरकारी प्रस्ताव के अनुसार अधिक शुल्क लिया जाएगा तो वह अपने निर्णय अलग तरीके से लेती।

अदालत ने कहा,

“जब लेन-देन पूरा हो चुका है और उसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा चुका है तब बाद में अतिरिक्त राशि मांगना अनुचित है।”

मामले के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 2002 में राज्य सरकार के साथ सिंगनपोर वीयर से पानी लेने के लिए 20 वर्षों का समझौता किया। इस समझौते के तहत कंपनी तय दरों पर पानी शुल्क का भुगतान कर रही थी और 2005 तक सरकार उसी आधार पर बिल जारी करती रही।

हालांकि, जुलाई 2005 में राज्य सरकार ने पुनर्मूल्यांकन करते हुए 1997-98 से 2005-06 की अवधि के लिए अतिरिक्त राशि की मांग की। यह दावा 2002 के एक सरकारी प्रस्ताव के आधार पर किया गया, जिसमें औद्योगिक और पेयजल उपयोग के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित की गई थीं।

सरकार का कहना था कि पहले के बिलों में “कानूनी रूप से वसूल की जाने वाली राशि” गलती से शामिल नहीं की गई। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि उस समय इस प्रस्ताव को लागू नहीं किया गया, इसलिए अब उसके आधार पर वसूली नहीं की जा सकती।

अंततः अदालत ने 21 जुलाई 2005 का नोटिस रद्द करते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज की याचिका स्वीकार की।

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