वाराणसी गंगा नाव इफ्तार विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट से 8 आरोपियों को मिली जमानत
उत्तरप्रदेश के इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी में गंगा नदी में नाव पर इफ्तार पार्टी आयोजित करने, कथित रूप से मांसाहारी भोजन करने और बचा हुआ खाना नदी में फेंकने के आरोप में गिरफ्तार 8 मुस्लिम युवकों को जमानत दी।
जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला ने पांच आरोपियों को जमानत दी, जबकि जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने तीन अन्य आरोपियों की जमानत मंजूर की। इसके साथ ही इस मामले में कुल 14 आरोपियों में से 8 को अब तक जमानत मिल चुकी है।
जिन आरोपियों को जमानत मिली है, उनमें मोहम्मद आजाद अली, मोहम्मद तहसीम, निहाल अफरीदी, मोहम्मद तौसीफ, मोहम्मद अनस, मोहम्मद समीर, मोहम्मद अहमद रजा और मोहम्मद फैजान शामिल हैं।
आरोपियों ने वाराणसी सेशन कोर्ट द्वारा 1 अप्रैल को जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद हाईकोर्ट का रुख किया था। इससे पहले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने भी उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।
सभी आरोपियों को 17 मार्च को वाराणसी पुलिस ने गिरफ्तार किया था। यह कार्रवाई भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष रजत जायसवाल की शिकायत पर की गई।
मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। इनमें समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने, सार्वजनिक उपद्रव, जल स्रोत को दूषित करने, पूजा स्थल का अपमान करने, धार्मिक भावनाएं आहत करने और उगाही जैसी धाराएं शामिल हैं। साथ ही जल प्रदूषण निवारण कानून की धारा 24 भी लगाई गई।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि पवित्र गंगा नदी में नाव पर बैठकर इफ्तार के दौरान चिकन बिरयानी खाना और उसका बचा हुआ हिस्सा नदी में फेंकना “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय” कृत्य है।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि यह कार्य जानबूझकर जिहादी मानसिकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया जिससे सनातन धर्म मानने वालों की भावनाएं आहत हुईं और लोगों में भारी आक्रोश फैल गया।