गुरुग्राम कोर्ट ने पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा को ED केस में 1 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजा

Update: 2026-05-18 11:32 GMT

गुरुग्राम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में पंजाब के मौजूदा मंत्री संजीव अरोड़ा की न्यायिक हिरासत के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) की अर्जी मंज़ूर की। अरोड़ा की ED हिरासत आज खत्म हो रही थी।

इस AAP नेता पर 100 करोड़ रुपये के GST घोटाले का आरोप है जो एक ऐसी कंपनी से जुड़ा है, जिसके वे पहले प्रमुख थे।

उन्होंने प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 (PMLA) के तहत अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया। उन्होंने अपनी गिरफ्तारी, गिरफ्तारी के आधार और रिमांड आदेश को रद्द करने की मांग की और आरोप लगाया कि वैधानिक सुरक्षा उपायों और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।

सेशन जज और PMLA के तहत स्पेशल जज नरेंद्र सूरा ने कहा,

“चूंकि जांच अभी भी चल रही है और न्यायिक हिरासत देने का आधार पर्याप्त है, इसलिए शिकायतकर्ता-प्रवर्तन निदेशालय की ओर से आरोपी की न्यायिक हिरासत की मांग को स्वीकार किया जाता है और ऊपर बताए गए आरोपी को 01.06.2026 तक न्यायिक हिरासत में भेजा जाता है।”

ED के स्पेशल वकील ज़ोहेब हुसैन ने कोर्ट में दलील दी कि सबूतों के साथ छेड़छाड़ और समन किए गए गवाहों को प्रभावित करने की आशंका है, जिससे आरोपी के खिलाफ चल रही जांच और जिन लोगों की जांच के लिए पहचान की गई, उन पर असर पड़ने की संभावना है इसलिए यह ज़रूरी है कि आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजा जाए।

आगे यह भी कहा गया कि BNSS, 2023 की धारा 187(2) के अनुसार आवेदक-ED अपने इस अधिकार को सुरक्षित रखता है कि वह आरोपी की गिरफ्तारी की तारीख से 40 दिनों की अनुमत अवधि के दौरान जब भी इस कोर्ट की अनुमति से ज़रूरी समझा जाए आरोपी की आगे की हिरासत की मांग कर सके।

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि अरोड़ा के वकील अर्जुन दीवान ने गुज़ारिश की कि सुपरिटेंडेंट, डिस्ट्रिक्ट जेल, भोंडसी, गुरुग्राम को निर्देश दिया जाए कि वे 10.05.2026 की पर्ची में लिखी ज़रूरी दवाएं मुहैया कराएं और उन्हें समय-समय पर ग्लूकोज़ लेवल चेक करने के लिए एक डिवाइस रखने की भी इजाज़त दी जाए,क्योंकि अरोड़ा डायबिटीज़ ग्रेड-II के मरीज़ हैं।

ऊपर कही बातों पर विचार करते हुए कोर्ट ने कहा,

सुपरिटेंडेंट, डिस्ट्रिक्ट जेल, भोंडसी को निर्देश दिया जाता है कि वे आरोपी को हिरासत में लेते समय पर्ची में लिखी दवाएं अपने साथ रखने की इजाज़त दें या फिर यह सुनिश्चित करें कि ये सभी दवाएँ जेल प्रशासन द्वारा नियमों के मुताबिक तुरंत मुहैया कराई जाएं। सुपरिटेंडेंट, डिस्ट्रिक्ट जेल, भोंडसी को यह भी निर्देश दिया जाता है कि वे आरोपी को अपने साथ कॉन्स्टेंट ग्लूकोज़ मॉनिटरिंग डिवाइस रखने की इजाज़त दें, जो उनके ग्लूकोज़ लेवल पर नज़र रखने के लिए ज़रूरी है बशर्ते नियमों के तहत इसकी इजाज़त हो और अगर इसकी इजाज़त नहीं है तो जेल में ही समय-समय पर उनके ग्लूकोज़ लेवल की नियमित जांच का इंतज़ाम किया जाए।”

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