पुलिसकर्मी के निजी मोबाइल से जारी ई-चालान अवैध, प्रक्रिया का उल्लंघन: श्रीनगर कोर्ट
श्रीनगर जिला कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि किसी पुलिस अधिकारी के निजी मोबाइल फोन से जारी किया गया ई-चालान कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं माना जा सकता। अदालत ने ऐसे तीन ई-चालानों को रद्द करते हुए कहा कि वे केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 167ए का उल्लंघन करते हैं।
जज शबीर अहमद मलिक ने कहा,
“किसी पुलिस अधिकारी के निजी मोबाइल या स्मार्टफोन से जारी चालान, आधिकारिक रूप से प्रमाणित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण से जारी चालान के बराबर नहीं माना जा सकता। ऐसा चालान प्रक्रिया संबंधी खामियों से ग्रस्त और कानूनी रूप से कमजोर है।”
मामला एक वाहन मालिक के खिलाफ जारी तीन ई-चालानों से जुड़ा था। इन चालानों में ट्रैफिक सिग्नल की अवहेलना और फुटपाथ पर वाहन चलाने जैसे आरोप लगाए गए। वाहन मालिक ने अदालत में पेश होकर चालानों को चुनौती दी।
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि जिस स्थान पर पहला चालान जारी किया गया, वहां कोई कार्यरत ट्रैफिक सिग्नल ही मौजूद नहीं था। साथ ही चालानों के साथ लगी तस्वीरों में न तो सिग्नल दिखाई दे रहा था और न ही किसी उल्लंघन का स्पष्ट प्रमाण था।
अदालत ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 167ए का परीक्षण किया। यह नियम 11 अगस्त 2021 को अधिसूचना के जरिए लागू किया गया, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और प्रवर्तन की विस्तृत प्रक्रिया तय की गई।
अदालत ने कहा कि नियम 167ए के तहत ई-चालान केवल आधिकारिक और प्रमाणित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से ही जारी किए जा सकते हैं। इनमें सीसीटीवी कैमरे, स्पीड कैमरे, बॉडी कैमरे, डैशबोर्ड कैमरे और अन्य सरकारी स्वीकृत उपकरण शामिल हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि निजी मोबाइल फोन, चाहे वह तकनीकी रूप से कितना भी उन्नत क्यों न हो केवल किसी पुलिस अधिकारी के पास होने से वह नियम 167ए के तहत मान्य उपकरण नहीं बन जाता।
फैसले में कहा गया कि ऐसे निजी उपकरण सरकारी निगरानी प्रणाली से जुड़े नहीं होते उनमें आधिकारिक प्रमाणीकरण नहीं होता और न ही वे जवाबदेही की उस व्यवस्था के अधीन होते हैं, जिसकी कल्पना नियम 167ए में की गई।
अदालत ने यह भी कहा कि नियम 167ए के तहत हर ई-चालान के साथ स्पष्ट फोटो, वाहन नंबर, तारीख, समय, स्थान, उल्लंघित प्रावधान और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65बी(4) के तहत प्रमाणपत्र देना अनिवार्य है। लेकिन इस मामले में ऐसा कोई रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया।
अदालत ने एस. राजशेखरन बनाम भारत संघ मामले का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही निर्देश दे चुका है कि ई-चालान केवल इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन उपकरणों के फुटेज के आधार पर ही जारी किए जाएं।
इन्हीं आधारों पर अदालत ने तीनों ई-चालानों को रद्द किया और ट्रैफिक पुलिस सहित सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि भविष्य में नियम 167ए और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए।
अदालत ने अपने आदेश की प्रति श्रीनगर ट्रैफिक पुलिस के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भी भेजने का निर्देश दिया।