बार-बार तारीख लेने पर NGO पर हाईकोर्ट ने लगाया 20 हजार का जुर्माना

Update: 2026-04-15 07:55 GMT

दिल्ली हाइकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बनी डॉक्यूमेंट्री को लेकर बीबीसी के खिलाफ दायर मानहानि मामले में बार-बार स्थगन मांगने पर NGO पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया।

जस्टिस मिनी पुष्कर्णा ने गुजरात स्थित NGO जस्टिस ऑन ट्रायल के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पहले ही अंतिम अवसर दिए जाने के बावजूद आज भी सुनवाई टालने की मांग की गई।

यह मामला उस 10,000 करोड़ रुपये के मानहानि वाद से जुड़ा है, जिसे NGO ने ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन के खिलाफ दायर किया था। NGO का आरोप है कि बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री 'इंडिया: द मोदी क्वेश्चन' ने देश, न्यायपालिका और प्रधानमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचाया।

सुनवाई के दौरान NGO की ओर से कहा गया कि वह मेंटेनेबिलिटी (विधिक स्वीकार्यता) के मुद्दे पर बहस के लिए नया वकील नियुक्त कर रहे हैं, इसलिए समय दिया जाए।

अदालत ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि पहले भी कई बार तारीख ली जा चुकी है और यह अंतिम अवसर होने के बावजूद फिर से स्थगन मांगा गया। अदालत ने आदेश में कहा कि बार-बार स्थगन लेने के कारण अब 20,000 रुपये की लागत लगाई जाती है।

गौरतलब है कि यह याचिका निर्धन व्यक्ति के रूप में दायर की गई और इस पर पहले नोटिस भी जारी हो चुका है। वहीं, मामले में मेंटेनेबिलिटी का मुद्दा पहले से विचाराधीन है।

हाईकोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त के लिए निर्धारित की और स्पष्ट किया कि आगे अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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