लालू यादव को बड़ा झटका: नौकरी के बदले जमीन मामले में CBI की FIR रद्द करने से हाइकोर्ट का इनकार
दिल्ली हाइकोर्ट ने राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव को बड़ा झटका देते हुए नौकरी के बदले जमीन घोटाले से जुड़े मामले में दर्ज CBI की FIR रद्द करने से इनकार किया।
जस्टिस रविंदर डुडेजा ने न केवल FIR रद्द करने की मांग ठुकराई, बल्कि इस मामले में दाखिल तीन आरोपपत्रों और निचली अदालत द्वारा लिए गए संज्ञान को भी बरकरार रखा।
अदालत ने कहा कि याचिका में कोई ठोस आधार नहीं है और इसे खारिज किया जाता है।
बता दें, इससे पहले भी मई, 2025 में हाइकोर्ट ने मामले की सुनवाई पर रोक लगाने से इनकार किया था और कहा था कि ट्रायल रोकने का कोई ठोस कारण नहीं है।
याचिका में लालू यादव ने दलील दी थी कि CBI द्वारा की गई जांच अवैध है, क्योंकि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत आवश्यक अनुमति नहीं ली गई। उनका कहना था कि बिना इस स्वीकृति के की गई जांच शुरू से ही अमान्य है और यह उनके निष्पक्ष जांच के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि यह मामला “राजनीतिक बदले की भावना” से प्रेरित है और धारा 17ए का उद्देश्य ऐसे ही मामलों से निर्दोष लोगों को बचाना है।
हालांकि, हाइकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट किया कि इस स्तर पर मामले को खत्म करने का कोई आधार नहीं बनता।
CBI के अनुसार, यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब रेलवे में ग्रुप-डी पदों पर नियुक्तियों के बदले लोगों या उनके परिजनों से जमीन ली गई। आरोप है कि यह जमीन लालू यादव के परिवार के सदस्यों और एक कंपनी के नाम पर ट्रांसफर की गई।
इस मामले में लालू यादव के अलावा उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती समेत कई अन्य लोग आरोपी हैं।
CBI ने यह भी कहा कि रेलवे में की गई ये नियुक्तियां भारतीय रेलवे के तय नियमों और मानकों के अनुरूप नहीं थीं।
हाइकोर्ट के इस फैसले के बाद अब इस मामले में ट्रायल की प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।