'उस्ताद भगत सिंह' पर आपत्तिजनक सामग्री पर रोक: बेंगलुरु कोर्ट ने जारी किया 'जॉन डो' आदेश

Update: 2026-03-19 07:40 GMT

एक्टर पवन कल्याण की फिल्म उस्ताद भगत सिंह को लेकर बेंगलुरु सिटी सिविल और सेशंस कोर्ट ने अहम आदेश देते हुए आपत्तिजनक और मानहानिकारक सामग्री के प्रसार पर अस्थायी रोक लगाई। अदालत ने 'जॉन डो' के तहत अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भी यह आदेश लागू किया।

मिथ्री मूवी मेकर्स द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने एकतरफा (एक्स-पार्टी) अंतरिम आदेश पारित किया।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि कोई भी व्यक्ति या मंच फिल्म के बारे में झूठी, दुर्भावनापूर्ण, अपमानजनक या मानहानिकारक सामग्री का प्रसारण, प्रकाशन या साझा नहीं करेगा।

अदालत ने स्पष्ट किया कि यह अंतरिम आदेश अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगा।

अपने आदेश में अदालत ने कहा कि जॉन डो आदेश केवल बौद्धिक संपदा (IPR) की सुरक्षा तक सीमित नहीं हैं बल्कि संपत्ति अधिकारों की रक्षा के लिए भी लागू किए जा सकते हैं।

इस संदर्भ में, कर्नाटक हाइकोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भी ऐसे आदेश दिए जा सकते हैं, जहां नुकसान की आशंका हो।

अदालत ने माना कि प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर प्रथम दृष्टया मामला बनता है। यदि अंतरिम राहत नहीं दी गई तो याचिका का उद्देश्य ही विफल हो सकता है तथा अनावश्यक मुकदमों की संख्या बढ़ सकती है।

इस मामले में यूट्यूब, एक्स (पूर्व ट्विटर), गूगल इंडिया, आईएमडीबी और मेटा जैसे प्रमुख डिजिटल मंचों को भी प्रतिवादी बनाया गया।

अदालत ने इन्हें भी फिल्म से संबंधित किसी भी तरह की आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार से रोक दिया।

फिल्म का निर्देशन हरीश शंकर ने किया है और इसका निर्माण मिथ्री मूवी मेकर्स ने किया।

मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल, 2026 को होगी।

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