कलकत्ता हाईकोर्ट ने जबरन वसूली के मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद कीर्ति आज़ाद को सख़्त कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा दी। कोर्ट ने पाया कि आज़ाद के ख़िलाफ़ लगाए गए आरोपों में कोर्ट में सुनाई गई ऑडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर, पहली नज़र में कोई दम नहीं दिखता।
जस्टिस कौशिक चंदा ने अंतरिम सुरक्षा देते हुए आज़ाद को निर्देश दिया कि वह पश्चिम बंगाल CID की जांच में सहयोग करें।
कोर्ट ने आज़ाद को 22 सितंबर को दोपहर में भवानी भवन में CID के सामने पेश होने का निर्देश दिया। साथ ही यह भी कहा कि अगर जांच एजेंसी को भविष्य में पूछताछ के लिए उनकी मौजूदगी की ज़रूरत पड़ती है, तो उन्हें सात दिन पहले नोटिस देना होगा।
कोर्ट ने जांच एजेंसी को छह हफ़्ते बाद रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया। इसके बाद मामले पर फिर से सुनवाई होने की उम्मीद है।
यह मामला एक व्यापारी के आरोपों से जुड़ा है, जिसने दावा किया कि आज़ाद के एक सहयोगी ने उससे 15 लाख रुपये की मांग की।
आरोपों के मुताबिक, व्यापारी को धमकी दी गई कि अगर उसने मांगी गई रकम नहीं दी तो उसका कुकिंग गैस डिस्ट्रीब्यूशन का कारोबार बंद कर दिया जाएगा। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के सामने इस कथित घटना से जुड़ी एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी पेश की गई।
मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस चंदा ने कहा कि कोर्ट में सुनाई गई ऑडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर पहली नज़र में आज़ाद पर लगाए गए आरोपों में कोई दम नहीं दिखता।
हालांकि, आज़ाद को चल रही जांच में सहयोग करने और 22 सितंबर को CID के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया।
Case: KIRTI VARDHAN AZAD VS STATE OF WEST BENGAL AND ANR