कानूनी पेशे में महिलाओं के लिए 'सिस्टरहुड' बेहद जरूरी: जस्टिस बीवी नागरत्ना
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि कानूनी पेशे में महिलाओं के लिए सिस्टरहुड यानी आपसी सहयोग और एकजुटता बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह व्यवस्था अब भी काफी हद तक पुरुष प्रधान बनी हुई है।
सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह की पुस्तक 'कांस्टीट्यूशन इज़ माई होम' के विमोचन समारोह में बोलते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि पुरुषों को पेशेवर दुनिया में स्वाभाविक सहजता और नेटवर्क का लाभ मिलता रहा है जबकि महिलाओं को अपनी जगह खुद बनानी पड़ी है।
उन्होंने कहा,
“कानूनी पेशा बेहद प्रतिस्पर्धी हो सकता है लेकिन सबसे स्थायी प्रगति तब हुई, जब महिलाओं ने अलग-थलग रहने के बजाय एकजुटता को चुना। पुरुषों को लंबे समय से सामाजिक नेटवर्क, सिफारिश और पेशेवर समर्थन का लाभ मिलता रहा है। एक तरह का ब्रदरहुड हमेशा मौजूद रहा है जहां वे सहज रूप से खुद को फिट पाते हैं। लेकिन महिलाओं के पास ऐसा नेटवर्क नहीं था। इसलिए इस पेशे में सिस्टरहुड बहुत जरूरी है।”
जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि महिलाओं के बीच यह एकजुटता केवल नारा नहीं, बल्कि एक सचेत बौद्धिक और पेशेवर प्रतिबद्धता है ताकि अवसर केवल व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित न रह जाए।
उन्होंने इंदिरा जयसिंह की सराहना करते हुए कहा कि जब उन्होंने कानूनी पेशे में प्रवेश किया, तब यह पूरी तरह पुरुष केंद्रित था। ऐसे माहौल में उन्होंने अपने लिए जगह बनाई और आने वाली महिलाओं के लिए रास्ता आसान किया।
जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि इंदिरा जयसिंह ने सुप्रीम कोर्ट परिसर में क्रेच सुविधा की मांग को लेकर भी याचिका दायर की थी, जो महिलाओं के लिए कार्यस्थल को अधिक अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था।
उन्होंने कहा,
“जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं तो वे संस्थाओं को भी बेहतर बनाती हैं। महिलाएं इस देश की बौद्धिक और संस्थागत विरासत पर समान अधिकार रखती हैं। महिलाएं कोई नई नहीं हैं, वे हमेशा से यहां रही हैं बराबरी की नागरिक, योगदानकर्ता और विचारक के रूप में।”
जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि कानूनी पेशे में महिलाओं की हर पीढ़ी ने अलग-अलग संघर्ष किए हैं। पहली पीढ़ी को अदालत में प्रवेश का अधिकार साबित करना पड़ा, अगली पीढ़ी को अपनी बात सुने जाने के लिए संघर्ष करना पड़ा फिर महिलाओं को यह साबित करना पड़ा कि वे सीनियर एडवोकेट बन सकती हैं और महत्वपूर्ण संवैधानिक मामलों में बहस कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि हर नई पीढ़ी पिछली पीढ़ियों के साहस और संघर्ष की विरासत को आगे बढ़ाती है।
कार्यक्रम में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत का संदेश भी पढ़कर सुनाया गया। उन्होंने इंदिरा जयसिंह को बधाई देते हुए कहा कि संविधान किसी विशेष वर्ग का नहीं, बल्कि सभी नागरिकों का समान अधिकार है।