सुप्रीम कोर्ट ने आज 25 अगस्त को YSR कांग्रेस पार्टी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें पार्टी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल 'Jagananna Connects' से फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और X पर पोस्ट हटाने और अकाउंट्स को ब्लॉक करने को चुनौती दी गई थी। पार्टी का आरोप था कि ये कार्रवाई आंध्र प्रदेश सरकार के कहने पर की गई।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने पार्टी की रिट याचिका खारिज करते हुए उसे मामले में क्षेत्राधिकार रखने वाले हाईकोर्ट का रुख करने की स्वतंत्रता दी।

क्या है मामला?

YSR कांग्रेस ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। पार्टी ने आरोप लगाया कि उसके आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से पोस्ट हटाने की कार्रवाई Shreya Singhal v. Union of India (2014) मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत की गई।

पार्टी के अनुसार, उसने 26 अक्टूबर 2025 को X पर कुर्नूल में अवैध बेल्ट दुकानों के कारण हुई एक घटना को लेकर पोस्ट किया था। इसके बाद पार्टी के खिलाफ FIR दर्ज की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि पोस्ट के जरिए मौजूदा आंध्र प्रदेश मुख्यमंत्री का अपमान किया गया और तेलुगु देशम पार्टी के कार्यकर्ताओं को भड़काने का प्रयास किया गया।

YSR कांग्रेस ने दावा किया कि इसके बाद भी वह इस मुद्दे पर पोस्ट करती रही और उसके खिलाफ लगातार FIR दर्ज की जाती रहीं।

पुलिस ने सोशल मीडिया पोस्ट हटाने के निर्देश दिए

याचिका के अनुसार, 27 जनवरी को कुर्नूल रूरल सर्किल के इंस्पेक्टर ऑफ पुलिस ने X को नोटिस जारी कर पार्टी द्वारा पोस्ट किए गए URLs को हटाने के लिए कहा।

इसके बाद पार्टी ने राज्य सरकार द्वारा कथित सेंसरशिप पर सवाल उठाते हुए एक और पोस्ट किया। याचिका के अनुसार, इस पर पुलिस इंस्पेक्टर ने IT Act की धारा 79(3)(b) और Information Technology Rules, 2021 के नियम 3(1)(d), (g) और (f) के तहत नोटिस जारी किया।

नोटिस में कथित तौर पर 36 घंटे के भीतर संबंधित पोस्ट और पूरे अकाउंट्स को हटाने का निर्देश दिया गया और ऐसा न करने पर safe harbour protection वापस लेने की चेतावनी दी गई।

Shreya Singhal फैसले का हवाला

YSR कांग्रेस ने दलील दी कि Shreya Singhal फैसले के अनुसार ऑनलाइन सामग्री को ब्लॉक या हटाने के लिए IT Act की धारा 69A के तहत केंद्र सरकार के नामित अधिकारी का आदेश या सक्षम अदालत का आदेश आवश्यक है।

पार्टी ने कहा कि उसे धारा 69A के तहत ऐसा कोई आदेश या सक्षम अदालत का आदेश प्राप्त नहीं हुआ। इसके बजाय, अलग-अलग पुलिस थानों के इंस्पेक्टरों ने धारा 79(3)(b) के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को पोस्ट और पूरे अकाउंट हटाने के निर्देश दिए।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए पार्टी को संबंधित हाईकोर्ट जाने को कहा और याचिका खारिज कर दी।

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