जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में मेंशन
कैश-एट-होम विवाद को लेकर जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में मेंशन किया गया। याचिका को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत के समक्ष मेंशन करते हुए जल्द सूचीबद्ध करने की मांग की गई।
वकील मैथ्यूज जे. नेदुमपारा ने मामले को मेंशन करते हुए कहा कि रजिस्ट्री मामले को सूचीबद्ध करने से इनकार कर रही है। उन्होंने कहा कि अदालत मामले को खारिज कर सकती है, लेकिन कम से कम रजिस्ट्री को इसे नंबर देकर सूचीबद्ध करना चाहिए।
एक अन्य याचिकाकर्ता ने स्वयं पेश होते हुए कहा कि लोकसभा की जांच समिति ने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित पाया है। ऐसे में FIR दर्ज करने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी के साथ समान व्यवहार होना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट के पास एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने की शक्ति है।
हालांकि, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने मामले को सूचीबद्ध किए जाने को लेकर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की।
पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली घनश्याम उपाध्याय की जनहित याचिका खारिज की थी। इसी सप्ताह दिल्ली हाईकोर्ट ने भी जस्टिस वर्मा के खिलाफ CBI जांच की मांग वाली एक अन्य याचिका खारिज की थी।
जस्टिस यशवंत वर्मा दिल्ली और इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस रह चुके हैं। उन्होंने लोकसभा की जांच प्रक्रिया लंबित रहने के दौरान अप्रैल में इस्तीफा दे दिया था।
जजेज इन्क्वायरी एक्ट के तहत गठित लोकसभा की जांच समिति ने अगस्त में अपनी रिपोर्ट लोकसभा को सौंपी थी। समिति ने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित पाया था।