सुप्रीम कोर्ट ने प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ मामला रद्द करने के फैसले को चुनौती देने वाली ED की याचिका पर नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई, जिसके तहत डिजिटल न्यूज़ पोर्टल 'न्यूज़क्लिक' और इसके संस्थापक-संपादक प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ दर्ज ECIR रद्द की गई थी। यह मामला विदेशी फंडिंग में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह आदेश पारित किया। सुनवाई के दौरान, ED की ओर से पेश ASG एस.वी. राजू ने मामले को 4 सप्ताह के लिए स्थगित करने का अनुरोध किया। उन्होंने बताया कि इस बीच दिल्ली पुलिस भी इसी आदेश के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने वाली है।
जस्टिस बागची ने टिप्पणी की,
"हम ED की SLP (विशेष अनुमति याचिका) से बहुत प्रभावित नहीं हैं।"
हालांकि, अंततः बेंच ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया।
29 मई को दिए गए एक फैसले में दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज FIR और ED द्वारा शुरू की गई मनी लॉन्ड्रिंग की कार्यवाही रद्द की। अदालत ने कहा कि इन कार्यवाहियों को जारी रखना कानूनी प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग है।
हाईकोर्ट ने पाया कि लगाए गए आरोपों से FIR में उल्लिखित अपराधों का होना साबित नहीं होता और यह कार्यवाही कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं है।
अगस्त 2020 में दर्ज इस FIR में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 406 (विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी) और 120B (आपराधिक साजिश) लगाई गई थीं।
यह मामला 'PPK न्यूज़क्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड' (जो न्यूज़क्लिक का संचालन करती है) को अमेरिका स्थित 'वर्ल्डवाइड मीडिया होल्डिंग्स LLC' से प्राप्त प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) से जुड़े आरोपों के कारण सामने आया था। जांच एजेंसी का आरोप था कि इस निवेश को इस तरह से तैयार किया गया ताकि डिजिटल न्यूज़ मीडिया में विदेशी निवेश से जुड़े प्रतिबंधों से बचा जा सके। इस फंड का एक हिस्सा वेतन, परामर्श शुल्क, किराए और अन्य खर्चों के लिए इस्तेमाल किया गया। इसके बाद ED ने 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA) के तहत एक 'एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट' (ECIR) दर्ज की। इसमें FIR में लगाए गए कथित अपराधों को अपनी जांच के लिए 'प्रेडिकेट ऑफेंस' (मूल अपराध) माना गया।
आरोपों को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से कथित 'शेड्यूल्ड ऑफेंस' (अनुसूचित अपराध) के होने की पुष्टि नहीं होती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि कंपनी के शेयर वैल्यूएशन और खर्च से जुड़े आरोप, अपने आप में किसी आपराधिक गड़बड़ी को साबित नहीं करते।
कोर्ट ने आगे कहा कि एक बार जब 'प्रेडिकेट FIR' (मूल FIR) रद्द की जाती है तो उससे जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग की कार्यवाही भी अपने आप खत्म हो जाती है।
ED ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देकर हाईकोर्ट के इस फैसले को पलटने की मांग की।
हाईकोर्ट द्वारा रद्द की गई यह कार्यवाही, दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल द्वारा 'न्यूजक्लिक' (NewsClick) और पुरकायस्थ के खिलाफ दर्ज UAPA मामले से अलग है। UAPA मामला विदेशी फंडिंग और कथित साजिश के आरोपों से जुड़ा है। वह मामला EOW की FIR और ED की कार्यवाही से पूरी तरह स्वतंत्र है।
Case Title : DIRECTORATE OF ENFORCEMENT versus M/S PPK NEWSCLICK STUDIOS PVT. LTD, DIARY NO. 63217/2026