ट्विशा शर्मा की मौत का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल कोर्ट में चल रहे ट्रायल पर लगाई रोक, केस दिल्ली ट्रांसफर करने की याचिका पर नोटिस जारी
सुप्रीम कोर्ट ने ट्विशा शर्मा की अप्राकृतिक मौत के मामले में भोपाल की सेशंस कोर्ट में चल रही सुनवाई पर रोक लगाई।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मामले को मध्य प्रदेश से दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग वाली याचिका पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), ट्विशा के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह को नोटिस जारी किया।
यह याचिका ट्विशा के पिता नवनीधि शर्मा ने दाखिल की है। उनका कहना है कि मध्य प्रदेश में निष्पक्ष सुनवाई को लेकर उन्हें आशंका है, क्योंकि मामले की आरोपी गिरिबाला सिंह पूर्व जज हैं और राज्य में उनका प्रभाव है।
नवनीधि शर्मा की ओर से सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा और सिद्धार्थ अग्रवाल के साथ एडवोकेट अभिजीत सिन्हा पेश हुए।
याचिकाकर्ता ने अदालत से मुकदमे को दिल्ली स्थानांतरित करने का अनुरोध करते हुए कहा कि वह दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं। फिलहाल यह मामला भोपाल में जिला एवं एडिशनल सेशंस जज की अदालत में लंबित है। 10 अक्टूबर तक ट्रायल आरोप तय करने के मुद्दे पर बहस के चरण में पहुंच चुका था। सुप्रीम कोर्ट ने अब आगे की कार्यवाही पर रोक लगाई।
सुप्रीम कोर्ट ने इस साल मई में ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में स्वतः संज्ञान लिया था। उस समय मध्य प्रदेश पुलिस की जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए गए। इसके बाद मामले की जांच CBI को सौंप दी गई।
बता दें, ट्विशा, 33 वर्षीय महिला थीं, जो 12 मई 2026 को भोपाल स्थित अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं। उनकी शादी 9 दिसंबर 2025 को समर्थ सिंह से हुई थी, यानी शादी के करीब पांच महीने बाद उनकी मौत हुई। समर्थ सिंह पेशे से वकील हैं, जबकि उनकी मां गिरिबाला सिंह सेवानिवृत्त जिला जज हैं। दोनों इस मामले में अभियोजन का सामना कर रहे हैं।
मामले में शुरुआती FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2), जो दहेज मृत्यु से संबंधित है, धारा 85, जो पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता से जुड़ी है, और धारा 3(5), जो साझा मंशा से संबंधित है, के तहत दर्ज की गई।
इसके अलावा दहेज निषेध अधिनियम की धाराएं 3 और 4 भी लगाई गई थीं, जो दहेज लेने-देने और दहेज की मांग से संबंधित हैं। राज्य पुलिस की जांच की निष्पक्षता को लेकर उठे सवालों के बाद सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से जांच CBI को सौंप दी गई।
CBI ने आरोपपत्र दाखिल करते समय गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज मृत्यु का आरोप हटाया और BNS की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया। अभियोजन का आरोप है कि गिरिबाला सिंह ने ट्विशा को ताने देकर और प्रताड़ित करके आत्महत्या के लिए उकसाया था।
समर्थ सिंह ने इससे पहले जमानत के लिए आवेदन किया था। उनकी ओर से दलील दी गई कि जांच पूरी नहीं हुई और वैधानिक समयसीमा पूरी करने के लिए 87वें दिन आरोपपत्र दाखिल किया गया।
हालांकि, भोपाल कोर्ट ने 6 अक्टूबर को उनकी जमानत याचिका खारिज की। अदालत ने कहा कि कुछ दस्तावेजों के अनुपस्थित होने मात्र से आरोपपत्र को अधूरा नहीं माना जा सकता।
रिटायर जिला जज गिरिबाला सिंह को इससे पहले 15 मई को भोपाल की ट्रायल कोर्ट ने अग्रिम जमानत दी थी। राज्य सरकार और मृतका के माता-पिता ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। इसके बाद हाईकोर्ट ने 27 मई को उनकी अग्रिम जमानत रद्द की।
अब सुप्रीम कोर्ट ने मामले का ट्रायल रोकते हुए केस को दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग पर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। आगे की कार्यवाही इस बात पर केंद्रित होगी कि निष्पक्ष सुनवाई की आशंका के आधार पर मुकदमे को मध्य प्रदेश से दिल्ली स्थानांतरित किया जाना चाहिए या नहीं।