सुप्रीम कोर्ट ने DERC नियुक्तियों के लिए चयन समिति बनाने में देरी पर दिल्ली सरकार को फटकारा, 2 दिन में समय-सीमा मांगी
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) में नियुक्तियों के लिए चयन समिति बनाने में हुई देरी पर सवाल किया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि लगभग एक साल से आयोग बिना किसी अध्यक्ष के चल रहा है, इसके बावजूद यह प्रक्रिया "कहीं नहीं पहुंचती" दिख रही है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ NGO 'एनर्जी वॉचडॉग' द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में DERC में नियमित नियुक्तियां करने और विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत एक चयन समिति बनाने की मांग की गई।
दिल्ली NCT सरकार की वकील ने कोर्ट को बताया कि चयन समिति बनाने का प्रस्ताव 4 मई, 2026 को पेश किया गया। उन्होंने इसके लिए और समय मांगा। उन्होंने कहा कि एक बार चयन समिति बन जाने के बाद विद्युत अधिनियम की धारा 85 के अनुसार, तीन महीने के भीतर नियुक्तियां पूरी कर ली जाएंगी।
हालांकि, चीफ जस्टिस ने काम में कोई प्रगति न होने पर चिंता जताई और टिप्पणी की,
"आप अभी कहीं नहीं पहुंचे हैं। अंततः यह प्रक्रिया भी कहीं नहीं पहुंचेगी।"
जब सरकार ने और समय मांगा तो कोर्ट ने दो दिन का समय दिया और कहा कि वह चयन समिति को अधिसूचित करने की समय-सीमा के बारे में स्पष्ट जानकारी चाहता है। कोर्ट ने कहा कि एक बार समिति बन जाने के बाद वह उसे एक तय समय-सीमा के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दे सकता है।
याचिकाकर्ता की ओर से वकील प्रणव सचदेवा ने दलील दी कि DERC के अध्यक्ष का पद किसी रिटायर्ड हाईकोर्ट जज द्वारा भरा जाना चाहिए, क्योंकि अन्य दो सदस्य तकनीकी सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि कम से कम एक सदस्य जज होना चाहिए, या ऐसा व्यक्ति होना चाहिए, जो जज बनने की योग्यता रखता हो। उन्होंने बताया कि पिछले एक साल से न्यायिक कार्य (Adjudicatory Functions) लगभग ठप पड़े हैं, क्योंकि अभी तक किसी अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हुई।
उन्होंने आगे बताया कि दोनों सदस्य 'प्रो-टेम' (अस्थायी) आधार पर काम कर रहे हैं। 18 अगस्त, 2025 को सुप्रीम कोर्ट में दिए गए आश्वासनों के बावजूद, अभी तक नियमित नियुक्तियां नहीं की गईं।
याचिकाकर्ता के वकील ने यह भी तर्क दिया कि विद्युत अधिनियम की धारा 85 के तहत चयन समिति की आवश्यकता तब नहीं होती, जब नियुक्त किया जाने वाला व्यक्ति पहले हाईकोर्ट जज रह चुका हो। उन्होंने कहा कि पहले भी अंतरिम व्यवस्थाएं थीं, जिनके तहत रिटायर्ड जजों को अस्थायी आधार पर नियुक्त किया गया था। साथ ही बताया कि ऐसी आखिरी नियुक्ति वाले व्यक्ति ने लगभग एक साल पहले अपना पद छोड़ दिया था।
CJI ने जवाब दिया कि इसीलिए कोर्ट ने इस मामले को अपने हाथ में लिया है।
कोर्ट ने सरकारी वकील को निर्देश दिया कि वे सिलेक्शन कमिटी बनाने की समय-सीमा के बारे में सक्षम अधिकारी से स्पष्ट निर्देश प्राप्त करें। मामले की अगली सुनवाई 29 मई को तय की।
कोर्ट ने आदेश दिया,
"हालांकि, हम यह जानना चाहेंगे कि सिलेक्शन कमिटी को कितने दिनों के भीतर अधिसूचित किया जाएगा, ताकि सिलेक्शन कमिटी को एक तय समय-सीमा के भीतर सिलेक्शन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए उचित निर्देश जारी किए जा सकें। विशेष रूप से इस मामले में वकील को सक्षम अधिकारी से स्पष्ट निर्देश प्राप्त करने होंगे। इस मामले को 29 तारीख को सूचीबद्ध करें।"
Case Title – Energy Watchdog v. Government of NCT of Delhi and Anr.